बोलता सच,राजस्थान/अलवर: राजस्थान के अलवर जिले की प्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। आर्द्रभूमियों के संरक्षण से जुड़े ‘कन्वेंशन ऑन वेटलैंड्स’ के तहत शुक्रवार को सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित किया गया। इसी अधिसूचना में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित कोपरा जलाशय को भी रामसर सूची में शामिल किया गया है। इसके साथ ही सिलीसेढ़ झील को भारत की 96वीं रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है।
दिल्ली–जयपुर के बीच स्थित, अलवर से 15 किमी दूर
सिलीसेढ़ झील राजस्थान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में अलवर शहर से करीब 15 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह झील दिल्ली से लगभग 160 किमी और जयपुर से करीब 150 किमी दूर है। अलवर पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से झील तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
जैव विविधता और पर्यटन का प्रमुख केंद्र
सिलीसेढ़ झील अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जानी जाती है। यहां सारस, किंगफिशर सहित 100 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व का प्रवेश द्वार होने के कारण यह क्षेत्र पर्यटन, पक्षी अवलोकन और प्रकृति फोटोग्राफी के लिए खास आकर्षण रखता है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जताया हर्ष
अलवर सांसद एवं केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि रामसर साइट का दर्जा मिलने से पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय आजीविका को नई मजबूती मिलेगी।
1845 से जुड़ा है ऐतिहासिक महत्व
सिलीसेढ़ झील का निर्माण 1845 में तत्कालीन शासक महाराजा विनय सिंह ने अलवर शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया था। झील के आसपास बनी प्राचीन जल-वाहिकाएं आज भी इसके ऐतिहासिक महत्व की पहचान हैं।
रामसर साइट घोषित होने के बाद सिलीसेढ़ झील अब अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभरकर सामने आई है, जिससे इसके संरक्षण और सतत विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
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