मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल सत्ताधारी दल का आंतरिक राजनीतिक मामला होता है, इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार के फैसलों का प्रभाव गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के जीवन में सुधार के रूप में दिखना चाहिए।
कानून-व्यवस्था और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि समाज के हर वर्ग, खासकर कमजोर तबकों के जान-माल और मजहब की सुरक्षा सुनिश्चित होना सरकार की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों को न्याय और सुरक्षा महसूस होनी चाहिए और यह सरकार व मंत्रियों के कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए।
ब्राह्मण समाज की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
मायावती ने हाल ही में लखनऊ में भाजपा से जुड़े एक युवा ब्राह्मण नेता पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और ब्राह्मण समाज की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहा है, जो चिंताजनक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकारों के दौरान “सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय” की नीति के तहत सभी वर्गों को न्याय और सुरक्षा दी गई थी।
यूपी में हुआ है बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार
गौरतलब है कि रविवार को योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, जिसमें छह नए मंत्रियों को शामिल किया गया जबकि दो मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया है। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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