महिला आरक्षण से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं स्मृति ईरानी ने बिना नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके गढ़ अमेठी में हराकर अपनी क्षमता साबित की थी। इसी संदर्भ में उन्होंने अखिलेश यादव को भी चुनौती दी कि वे गोरखपुर जैसी सीट से चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाएं।
स्मृति ईरानी ने कहा कि पारंपरिक या पैतृक सीट से चुनाव जीतना आसान होता है, लेकिन असली राजनीतिक क्षमता तब साबित होती है जब कोई नेता दूसरे के गढ़ में जाकर जीत हासिल करे। उन्होंने कहा कि “मुझ जैसी कामकाजी महिला ने यह करके दिखाया है, लेकिन अखिलेश यादव में ऐसा करने का दम नहीं दिखता।”
इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव की ओर से महिला आरक्षण के मुद्दे पर की गई टिप्पणी पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष संसद में महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में मजबूती से खड़ा होता, तो यह एक सकारात्मक योगदान होता। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने महिला सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना की।
स्मृति ईरानी ने अपने भाषण में तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कभी जमीनी स्तर पर काम नहीं करते, वे ही अधिक टिप्पणी करते हैं। उन्होंने कहा कि एक गंभीर राजनेता को गांव-गांव जाकर लोगों के बीच काम करना पड़ता है, इसके लिए समय और मेहनत दोनों की जरूरत होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की भूमिका में अखिलेश यादव का बने रहना तय है। साथ ही उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि “गंभीर नेता के पास सीरियल देखने का समय नहीं होता,” जिसे राजनीतिक हलकों में अखिलेश यादव पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। महिला आरक्षण और चुनावी रणनीति जैसे मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है।