सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “काले कर्मों से जो महल सजाते हैं, वही इतिहास में कलंक बन जाते हैं।” उन्होंने पूर्ववर्ती सपा सरकारों पर निशाना साधते हुए 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया, जिसमें बसपा प्रमुख मायावती के साथ अभद्रता की घटना हुई थी। योगी ने कहा कि उस समय दिवंगत नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने हस्तक्षेप कर उनकी जान बचाई थी।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सपा शासनकाल में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय थी। उन्होंने कहा कि उस समय “देख सपाई, बिटिया घबराई” जैसा नारा प्रचलित था और परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर भेजने को मजबूर थे। इसके विपरीत उन्होंने वर्तमान सरकार में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित होने का दावा किया।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने शाहबानो मामला का जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस को उस घटना का “श्राप” मिला है, जिसके चलते लंबे समय से यूपी में उसकी सरकार नहीं बन पाई। उन्होंने तीन तलाक कानून का विरोध करने को लेकर भी सपा और कांग्रेस की आलोचना की।
सपा पर हमला जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी के नेता अपराधियों के सामने झुकते रहे हैं। उन्होंने पूर्व विधायक पूजा पाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पति की हत्या के बाद भी सपा नेताओं ने संवेदना तक नहीं जताई। साथ ही उन्होंने आजम खान, एसटी हसन और अबू आजमी के बयानों को भी महिला विरोधी बताया।
सीएम योगी ने यह भी आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक गिरने के बाद सपा और कांग्रेस नेताओं ने एक-दूसरे को बधाई दी थी, जिसके दृश्य भी सामने आए थे।
इस पूरे भाषण के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।