बोलता सच,बड़ौत : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान और यूजीसी एक्ट के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सोमवार को बड़ौत पहुंचे। उन्होंने यूजीसी एक्ट को एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को प्रभावित करना है।
बड़ौत की आवास कॉलोनी निवासी नीरज वत्स के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में अग्निहोत्री ने कहा कि वे अगले दो-तीन दिनों में योजना बनाकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात करेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल शंकराचार्य की ओर से किसी भी पद को स्वीकार करने का उनका कोई इरादा नहीं है।
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने आरोप लगाया कि जो लोग भारतीय जनता पार्टी का विरोध करते हैं, उन्हें ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों के माध्यम से परेशान किया जाता है, जबकि सरकार का समर्थन करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने सरकार से यूजीसी एक्ट वापस लेने की मांग की थी, लेकिन 26 जनवरी तक कोई निर्णय न होने पर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा केवल पद छोड़ना नहीं, बल्कि एक संदेश था, जिसे जनता ने समझा और करीब 1400 संगठनों ने समर्थन दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर विशेष संसदीय सत्र बुलाकर फैसला नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे और दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
भाजपा नेता दीपक शर्मा का बयान
इस दौरान भाजपा नेता दीपक शर्मा ने चंद्रशेखर आजाद का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों पर झूठे मुकदमों की धमकी देकर दबाव बनाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 95 प्रतिशत शिकायतें फर्जी होती हैं, जिनके चलते सामान्य वर्ग और ओबीसी समाज के लोगों को प्रताड़ित किया जाता है।
इस्तीफे की वजह
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने सरकारी नीतियों, विशेष रूप से यूजीसी 2026 नियमों से असहमति के कारण इस्तीफा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी माहौल बनाया जा रहा है। जेल में एक ब्राह्मण कैदी की मौत, शंकराचार्य के शिष्यों के साथ मारपीट और यूजीसी के नए नियम इसी मानसिकता का हिस्सा हैं। बैठक में राधेश्याम एडवोकेट, भाजपा नेता दीपक शर्मा सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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