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अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया की नजरें, कूटनीति के नए समीकरणों पर उठे सवाल

Bolta Sach News
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The world on US-Iran talks
बोलता सच,नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हो रही अहम वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। इस बातचीत को संभावित शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही वैश्विक कूटनीति, शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं।

यह वार्ता सिर्फ दो देशों के बीच बातचीत नहीं, बल्कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का संकेत भी मानी जा रही है। खासकर पाकिस्तान की भूमिका, भारत की विदेश नीति और वैश्विक मंच पर बदलते समीकरण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक शांति की उम्मीद जगा सकती है, लेकिन इज़रायल की आक्रामक नीतियां इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने भारत की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान को इस तरह की भूमिका कैसे मिल गई, जबकि अतीत में मनमोहन सिंह की सरकार ने 2008 मुंबई आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को प्रभावी रूप से अलग-थलग कर दिया था।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “नमस्ते ट्रंप” और “हाउडी मोदी” जैसे आयोजनों के बावजूद अमेरिका के साथ भारत अपने रणनीतिक हितों को मजबूत क्यों नहीं कर सका। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि BRICS+ के अध्यक्ष के रूप में भारत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर मध्यस्थता की पहल क्यों नहीं की, जबकि ईरान सहित कई पश्चिम एशियाई देश इस समूह का हिस्सा हैं।

जयराम रमेश ने चीन की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय में भारत की नीति से क्या हासिल हुआ, खासकर तब जब चीन लगातार पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है।

इस बीच, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों पर भी असर पड़ा है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता यदि सफल रहती है तो न केवल क्षेत्रीय शांति बहाल हो सकती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्थिरता आएगी। वहीं, विफलता की स्थिति में तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

ऐसे में यह स्पष्ट है कि अमेरिका-ईरान वार्ता आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


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