जिलाधिकारी ने तटबंधों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही रेनकट और शाही होल जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराने के निर्देश दिए। अधिशासी अभियंता (बाढ़) को निर्देशित किया गया कि बोल्डर, जियोबैग और अन्य आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता हर समय बनी रहे। इसके अलावा नाव, नाविक और गोताखोरों की पहले से पहचान कर उन्हें तैयार रखने तथा उनके भुगतान में देरी न होने की बात भी कही गई।
उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के संवेदनशील तटबंधों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। राहत शिविरों की पहचान कर उन्हें पहले से तैयार रखने और बाढ़ नियंत्रण कक्षों को सक्रिय करने के लिए भी कहा गया। कर्मचारियों की ड्यूटी तय कर आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
पेयजल व्यवस्था को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी को सभी हैंडपंपों की जांच कर खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराने और उथले हैंडपंपों को चिन्हित कर लाल निशान लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि दूषित पानी के इस्तेमाल से बचा जा सके। पशुओं के लिए चारा, भूसा और साइलेज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और टीकाकरण योग्य बच्चों की सूची तैयार करने को कहा गया है। साथ ही आवश्यक दवाएं, एंटी स्नेक वेनम, मेडिकल टीम और लाइफ जैकेट जैसी जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने बाढ़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस तैयारियों की जानकारी दी। वहीं, अधिशासी अभियंता (बाढ़) राधे श्याम प्रसाद ने बताया कि जिले में 12 नई बाढ़ निरोधी परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, जिन्हें 15 जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि जनपद में कुल 40 तटबंध हैं, जिनकी लंबाई 241.048 किलोमीटर है। इसके अलावा 56 ड्रेन (734.78 किलोमीटर) और 27 रेगुलेटर संचालित हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार बाढ़ से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएंगी।