पुलिस के मुताबिक, आरोपी रामवीर सिंह का आपराधिक इतिहास लंबा है और उसके खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण और धोखाधड़ी जैसे करीब 13 मुकदमे विभिन्न जिलों में दर्ज हैं। इनमें फिरोजाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद, हरदोई, मैनपुरी और बदायूं शामिल हैं।
जीआरपी थाना हाथरस सिटी के प्रभारी सुयश सिंह के अनुसार, आरोपी को 2013 में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के चलते पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। गिरफ्तारी और जेल से बचने के लिए उसने खुद को मृत दिखाने की साजिश रची।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने 11-12 मार्च की रात हाथरस रोड रेलवे प्लेटफॉर्म पर सो रहे एक भिखारी को निशाना बनाया। उसने उस पर केरोसिन डालकर जिंदा जला दिया। इसके बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने अपना जला हुआ आधार कार्ड और मोबाइल फोन शव के पास रख दिया, ताकि शव की पहचान उसी के रूप में हो सके।
हालांकि, इस घटना के दौरान आरोपी खुद भी झुलस गया। वह इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचा, जहां उसने खुद को एक प्राइवेट वाहन चालक बताते हुए सीएनजी सिलेंडर फटने से जलने की कहानी गढ़ी। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे सैफई पीजीआई रेफर कर दिया गया।
जांच के दौरान पुलिस को अस्पताल से सूचना मिली कि एक जला हुआ मरीज भर्ती हुआ है, जिसका नाम और पता उस आधार कार्ड से मेल खा रहा है जो घटनास्थल से मिला था। इसके बाद पुलिस टीम सैफई पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
आरोपी की पहचान रामवीर सिंह (55) पुत्र सीताराम, निवासी बघौनी गांव, थाना किशनी, मैनपुरी के रूप में हुई है। वह करीब 23 वर्षों तक पुलिस सेवा में रहा और उसकी आखिरी तैनाती बरेली के सुभाषनगर थाने में थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस खुलासे के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और पुलिस की जांच को लेकर सराहना भी हो रही है।