सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 2017 में अनुराग ठाकुर पर लगाया गया ‘सीज एंड डिसिस्ट’ निर्देश उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए उचित था, लेकिन वर्तमान हालात में उस प्रतिबंध को जारी रखना आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि अनुराग ठाकुर ने उस समय बिना किसी शर्त के अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी थी। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि पुराने आदेश में संशोधन किया जाना न्यायसंगत है।
गौरतलब है कि जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई में सुधारों को लागू न करने के कारण तत्कालीन अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को बोर्ड के कामकाज से पूरी तरह दूर रहने का निर्देश दिया था। उस आदेश के तहत ठाकुर किसी भी रूप में बीसीसीआई की गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते थे। अब लगभग नौ साल बाद अदालत ने उस रोक को हटा दिया है।
अनुराग ठाकुर का बीसीसीआई कार्यकाल मई 2016 से जनवरी 2017 तक रहा। वे बीसीसीआई के सबसे युवा अध्यक्षों में शामिल रहे। 22 मई 2016 को उन्हें बीसीसीआई का अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया था। यह चुनाव पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के निधन के बाद हुआ था। अध्यक्ष बनने से पहले अनुराग ठाकुर मार्च 2015 से मई 2016 तक बीसीसीआई के सचिव भी रह चुके थे। इसके अलावा वे 2011 में संयुक्त सचिव और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
अनुराग ठाकुर को पद से हटाए जाने की पृष्ठभूमि लोढ़ा समिति की सिफारिशों से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2016 में बीसीसीआई सुधारों के लिए गठित लोढ़ा समिति की अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार किया था और बोर्ड को इन्हें लागू करने के लिए चार से छह महीने का समय दिया गया था। इनमें ‘एक राज्य, एक वोट’, 70 वर्ष की आयु सीमा और कार्यकाल के बीच तीन साल के कूलिंग-ऑफ जैसे अहम सुधार शामिल थे।
हालांकि, अक्टूबर 2016 में बीसीसीआई की विशेष आम सभा में इन सिफारिशों को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया। दिसंबर 2016 की सुनवाई में तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने यहां तक कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत को गुमराह किया गया है। अंततः जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर और तत्कालीन सचिव अजय शिर्के को पद से हटा दिया था।
अब फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन कर अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई से जुड़े मामलों में दोबारा भागीदारी की अनुमति दे दी है, जिसे उनके लिए एक बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।
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