विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। इस मामले की सुनवाई और बहस पहले ही पूरी हो चुकी थी और आज निर्णय घोषित किया गया।
अदालत ने जिन आरोपियों को बरी किया, उनमें अभय सिंह (विधायक), संदीप सिंह, संजय सिंह, विनीत सिंह, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह शामिल हैं।
फैसले के मद्देनजर कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस प्रशासन ने संभावित भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की थी।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत 2 एसीपी, 5 थानाध्यक्ष, 30 दरोगा, 10 महिला कांस्टेबल और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा एहतियातन फायर ब्रिगेड और पीएसी की एक बटालियन भी मौके पर मौजूद रही।
अपूर्व पांडेय ने बताया कि पूरे कचहरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रही और कहीं से भी किसी तरह की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।
गौरतलब है कि यह मामला 4 अप्रैल 2002 का है, जब धनंजय सिंह और उनके साथियों पर जानलेवा हमला हुआ था। लंबे समय तक चले इस चर्चित मामले में अब अदालत के फैसले के साथ सभी आरोपियों को राहत मिल गई है।