यह मामला 19 अगस्त 2020 का है, जब मालाखेड़ा के लीली गांव निवासी मामचंद, जो सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल था, ने अपने बेटे कुनाल को जहर देकर मार डाला। घटना के बाद बच्चे के नाना जगदीश प्रसाद, जो फरीदाबाद के रहने वाले हैं, ने आरोपी दामाद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और जांच के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाह और 26 अहम दस्तावेज अदालत में पेश किए। मुकदमे में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि आरोपी ने बेटे की हत्या से दो महीने पहले अपनी पत्नी रेखा को भी जहर देकर मार दिया था, लेकिन उस समय सामाजिक दबाव के चलते मामला दर्ज नहीं कराया गया।
इसके अलावा, आरोपी ने अपनी दो बेटियों—डॉली और सोनाक्षी—को भी भर्तृहरि क्षेत्र में ले जाकर मारने की कोशिश की थी, हालांकि वे बच गईं। नाना के अनुसार, आरोपी अपनी पत्नी से जुड़ी हर निशानी को खत्म करना चाहता था।
करीब छह साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामचंद को दोषी ठहराया। सरकारी वकील अजीत यादव के मुताबिक, आरोपी ने जनवरी 2026 में ही नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी।
अदालत ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक पिता द्वारा अपने संरक्षण में रह रहे बच्चे की हत्या करना समाज और मानवता पर कलंक है। इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय जरूर मिला है, लेकिन उनकी अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है।