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लद्दाख में 5 नए जिलों पर सियासत तेज, असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

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Politics over 5 new districts in Ladakh
बोलता सच,नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा लद्दाख में पांच नए जिलों के गठन के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। नए प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद अब लद्दाख में जिलों की संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला दूरदराज क्षेत्रों तक प्रशासन पहुंचाने और स्थानीय विकास को गति देने के लिए लिया गया है।
लद्दाख में बनाए गए नए जिलों में नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं पहले से अधिक आसानी से मिल सकेंगी।

ओवैसी ने जताई आपत्ति

AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिलों के पुनर्गठन में जनसंख्या संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले के जरिए लद्दाख की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
ओवैसी ने दावा किया कि मुस्लिम और बौद्ध आबादी के अनुपात को देखते हुए जिलों का बंटवारा संतुलित नहीं दिखाई देता। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

अमित शाह के दौरे से पहले फैसला

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का लद्दाख दौरा प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरे से पहले सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

सरकार का दावा

सरकार का कहना है कि नए जिलों के गठन से शासन व्यवस्था मजबूत होगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विकास योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचेगा। हालांकि विपक्ष इस फैसले को राजनीतिक नजरिए से देख रहा है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने के आसार हैं।

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