बोलता सच,कोलकाता : शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद लगातार कई बड़े प्रशासनिक फैसले लेकर राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पिछले चार दिनों में लिए गए उनके फैसलों की तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे “बंगाल में योगी मॉडल” के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज नियंत्रित करने, सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने और स्कूलों में वंदे मातरम् का गान अनिवार्य करने जैसे फैसले लिए। इसके अलावा उन्होंने 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा और हत्याओं की फाइलें दोबारा खोलने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने गोवंश हत्या से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू करने के आदेश भी जारी किए हैं, जिनमें छह महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान शामिल है। हाल ही में तिलजला इलाके में आग लगने की घटना के बाद अवैध इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। साथ ही अवैध बूचड़खानों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
इन फैसलों के बाद शुभेंदु अधिकारी की तुलना लगातार योगी आदित्यनाथ से की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सख्त प्रशासनिक फैसले, बुलडोजर कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े रुख की वजह से दोनों नेताओं की शैली में समानता दिखाई दे रही है।
दिलचस्प बात यह भी रही कि शुभेंदु अधिकारी की कुर्सी पर भगवा रंग का तौलिया देखा गया, जिसे लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। आमतौर पर नेताओं की कुर्सियों पर सफेद तौलिया होता है, जबकि योगी आदित्यनाथ लंबे समय से भगवा तौलिये का इस्तेमाल करते रहे हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। माना जाता है कि जिन सीटों पर योगी ने प्रचार किया, वहां भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। चुनाव प्रचार के दौरान कांथी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में शुभेंदु अधिकारी का योगी आदित्यनाथ के सामने दंडवत होना भी काफी चर्चा में रहा था। उस समय शुभेंदु ने इसे गोरखनाथ मंदिर के महंत के प्रति सम्मान बताया था।
शपथ ग्रहण समारोह में शुभेंदु अधिकारी के केसरिया कुर्ते और योगी आदित्यनाथ द्वारा उन्हें भगवा साफा पहनाने की तस्वीरें भी खूब वायरल हुई थीं। इससे दोनों नेताओं की राजनीतिक और वैचारिक नजदीकियों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।
वहीं, हिमंत बिस्व सरमा को लेकर भी शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह उन्हें अपना बड़ा भाई मानते हैं और उनसे प्रशासन चलाने के तरीके सीखना चाहते हैं। माना जा रहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हिमंत मॉडल भी बंगाल सरकार की रणनीति का हिस्सा बन सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था, निवेश और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर नई सरकार सख्त रुख अपनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ और हिमंत बिस्व सरमा की कार्यशैली का प्रभाव शुभेंदु अधिकारी की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों में साफ दिखाई दे रहा है।
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