पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
मां के फोन से खुला मामला
मृतक छात्रा लखनऊ की रहने वाली थी और फरवरी 2026 में संस्थान में एमडी (साइको) प्रथम वर्ष में दाखिला लिया था। रविवार को उसकी मां लगातार फोन कर रही थीं, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने छात्रा के सहपाठी सिद्धार्थ शर्मा को फोन कर हाल जानने को कहा।
शाम करीब 5:28 बजे जब सहपाठी कमरे पर पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी प्रयास के बाद दरवाजा तोड़ा गया, जहां छात्रा बेड पर अचेत पड़ी मिली।
डिप्रेशन का चल रहा था इलाज
संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. दिनेश राठौर के मुताबिक, छात्रा डिप्रेशन से जूझ रही थी और उसकी दवाएं चल रही थीं। परिजन भी लगातार उसके संपर्क में रहते थे और उसका ध्यान रख रहे थे।
उत्पीड़न का आरोप और पुरानी घटना
जानकारी के अनुसार, छात्रा ने पहले एक सीनियर डॉक्टर पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। हालांकि जांच में आरोप सही नहीं पाए गए थे। इसके बाद से वह तनाव में रहने लगी थी। बताया जा रहा है कि 27 मार्च को भी उसने नींद की गोलियों का ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था।
जांच के लिए बनी टीम
घटना की जांच के लिए पुलिस और संस्थान दोनों स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। एसीपी हरीपर्वत अमीषा के अनुसार, छात्रा के फोन और सोशल मीडिया की जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने कोई संदेश छोड़ा था या नहीं।
वहीं, संस्थान की ओर से भी तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।