सरकार के कड़े रुख के बाद मंडलों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों के एडेड स्कूलों से तत्काल प्रस्ताव मंगाएं, ताकि कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को नियमित वेतन दिया जा सके। अन्य मंडलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
यह निर्णय इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत को लागू करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई वरिष्ठ शिक्षक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहा है और उसके हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं, तो उसे तीन महीने बाद से नियमित प्रधानाचार्य के बराबर वेतन मिलना चाहिए, जब तक कि नियमित नियुक्ति न हो जाए या वह सेवानिवृत्त न हो जाए।
हालांकि, कोर्ट के आदेश के बावजूद मंडल और जिला स्तर पर इसे लागू करने में देरी और टाल-मटोल देखने को मिली। इसके बाद सरकार ने सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को चेतावनी जारी की थी कि आदेश के पालन में देरी होने पर कार्रवाई की जाएगी। इस चेतावनी का असर अब साफ नजर आ रहा है और विभिन्न मंडलों में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदेश में कुल 4512 एडेड माध्यमिक स्कूल हैं, जिनमें से 3500 से अधिक स्कूलों में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं। ऐसे में वर्षों से इन स्कूलों का संचालन कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के भरोसे ही चल रहा है। बावजूद इसके, उन्हें अब तक शिक्षक के वेतनमान पर ही काम करना पड़ रहा था, जिससे उनमें असंतोष था।
माध्यमिक शिक्षक संघ के नेताओं का कहना है कि सरकार के इस फैसले से हजारों शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही वेतन असमानता की समस्या का समाधान होगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह आदेश जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू होता है।