मिली जानकारी के अनुसार, चरथावल थाना क्षेत्र में रहने वाले तहसीन के घर में अचानक एक बंदर घुस आया। उस समय घर में मौजूद उनकी तीन माह की बेटी कलसुम को बंदर ने उठा लिया और अपने पास बैठाकर उसे पकड़ लिया। परिजनों ने जब बच्ची को छुड़ाने की कोशिश की, तो बंदर ने आक्रामक रूप धारण कर लिया। इस दौरान उसने करीब आधा दर्जन लोगों पर हमला कर दिया, जिसमें 3-4 लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग दहशत में आ गए।
सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन बंदर के आक्रामक व्यवहार के कारण स्थिति को नियंत्रित करना आसान नहीं था। इसी बीच चरथावल निवासी पशु प्रेमी सन्नी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने हालात का आकलन करते हुए जल्दबाजी न दिखाकर रणनीति के तहत बंदर का ध्यान भटकाने की योजना बनाई।
करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सन्नी और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक बंदर का ध्यान दूसरी ओर मोड़ा और बच्ची को सुरक्षित छुड़ा लिया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना के दौरान बंदर ने बच्ची को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। रेस्क्यू के बाद बच्ची को उसके परिजनों को सकुशल सौंप दिया गया, जिससे सभी ने राहत की सांस ली।
पशु प्रेमी सन्नी के अनुसार, बंदर ने बच्ची को नुकसान नहीं पहुंचाया क्योंकि संभवतः उसने उसे अपना बच्चा समझ लिया था। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि हो सकता है बंदर का अपना बच्चा हाल ही में मर गया हो, जिसके चलते वह इस तरह का व्यवहार कर रहा था। सन्नी की संस्था “श्री बालाजी चैरिटेबल सोसाइटी” की टीम ने पूरी सावधानी के साथ इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
इस दौरान पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद रहा और पूरी स्थिति पर नजर बनाए रखी। घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है। इस घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच डर का माहौल बना हुआ है और वन विभाग से बंदरों की बढ़ती समस्या पर ध्यान देने की मांग उठने लगी है।