मानसून पर असर, कम बारिश के आसार
अल नीनो की आहट के साथ ही भारत में मानसून को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान जता चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अल नीनो मजबूत होता है तो इसका असर खेती, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासतौर पर वर्षा आधारित कृषि वाले क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
हीटवेव का बढ़ेगा खतरा
WMO की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मई, जून और जुलाई के दौरान दुनिया के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है। इसका मतलब है कि भारत में भी भीषण गर्मी और हीटवेव का खतरा बढ़ेगा। इससे बिजली की मांग, पानी की खपत और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। शहरों में ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव और तीव्र होने की आशंका है।
हिमालयी बर्फ में रिकॉर्ड गिरावट
चिंता की एक और बड़ी वजह हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में बर्फ का तेजी से घटता स्तर है। इस साल यहां बर्फ की मात्रा सामान्य से 27.8% कम दर्ज की गई है, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है। इसका असर नदियों के प्रवाह पर पड़ सकता है और करीब दो अरब लोगों की जल सुरक्षा खतरे में आ सकती है।
समुद्री तापमान बढ़ने से संकेत तेज
प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो अल नीनो के विकसित होने का प्रमुख संकेत है। WMO के अनुसार, जलवायु मॉडल इस बात पर लगभग एकमत हैं कि आने वाले महीनों में अल नीनो और मजबूत होगा, जिससे वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होगी।
कहीं सूखा, कहीं बाढ़ का खतरा
अल नीनो का प्रभाव हर क्षेत्र में अलग-अलग होता है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने सरकारों को पहले से तैयारी करने, जल प्रबंधन मजबूत करने और कृषि रणनीतियों में बदलाव की सलाह दी है, ताकि संभावित संकट का सामना किया जा सके।