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आर्थिक अपराधों पर कसेगा शिकंजा, आधुनिक तकनीक से सशक्त होगा आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन

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Tightening the noose on economic crimes
बोलता सच,लखनऊ। आर्थिक अपराधों के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक प्रभावी, त्वरित एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को आधुनिक तकनीक, सुदृढ़ जांच व्यवस्था तथा प्रभावी अनुश्रवण तंत्र से सशक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संगठन की कार्यप्रणाली एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में शीघ्र जांच, कठोर कार्रवाई और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में आर्थिक अपराधों से संबंधित लंबित जांच, विवेचनाओं, गिरफ्तारियों, अभियोजन, जनजागरूकता गतिविधियों तथा संगठनात्मक सुधारों की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी, जालसाजी, गबन तथा अन्य आर्थिक अपराध केवल सरकारी संसाधनों को ही प्रभावित नहीं करते, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी आघात पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में बताया गया कि लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2026 में 31 मई तक 155 जांच, विवेचना एवं अनुवर्ती कार्यवाहियों का निस्तारण किया जा चुका है। इसी अवधि में 71 अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुराने मामलों के निस्तारण में और तेजी लाई जाए तथा वांछित अभियुक्तों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं, उनमें अभियोजन एवं न्यायिक प्रक्रिया को गति दी जाए। सुदृढ़ पैरवी, गुणवत्तापूर्ण विवेचना तथा साक्ष्य संकलन के माध्यम से अधिकाधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
महत्वपूर्ण प्रकरणों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी करने और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि जांच, विवेचना तथा अनुवर्ती कार्यवाहियों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रकरण प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है। यह व्यवस्था प्रकरणों के डिजिटल प्रबंधन, ऑनलाइन प्रतिवेदन, वास्तविक समय निगरानी तथा डैशबोर्ड आधारित अनुश्रवण की सुविधा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इसके प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था से जांच की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि कोई भी जांच अधिकारी किसी प्रकरण को तीन माह से अधिक समय तक अपने पास लंबित न रखे। इस संबंध में अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।

जनजागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने आर्थिक अपराधों की रोकथाम में जनजागरूकता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में वित्तीय धोखाधड़ी, निवेश संबंधी ठगी तथा अन्य आर्थिक अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना आवश्यक है।
बैठक में जानकारी दी गई कि संगठन द्वारा “जागरूकता, जानकारी, बचाव” अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से नागरिकों को विभिन्न प्रकार के आर्थिक अपराधों से बचाव संबंधी जानकारी प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान को और व्यापक स्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आर्थिक मामलों से जुड़े प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पोंजी योजनाओं, बहुस्तरीय विपणन, चिटफंड घोटालों तथा साइबर धोखाधड़ी जैसे विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक तकनीक का अधिकाधिक उपयोग किया जाए।
बैठक में संगठन की क्षमता वृद्धि, अधिकारियों एवं विवेचकों के प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा संगठन के विस्तार से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को आधुनिक संसाधनों, तकनीकी दक्षता और प्रभावी कार्यप्रणाली से सुसज्जित करना आवश्यक है, ताकि आर्थिक अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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