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क्या एनसीपी (शरद पवार) एनडीए में जाएगी? अटकलों के बीच सुप्रिया सुले ने किया बड़ा खुलासा

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Is NCP (Sharad Pawar) NDA

बोलता सच,नई दिल्ली : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) के संभावित विलय तथा उसके बाद एनडीए में शामिल होने की अटकलों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब यह दावा किया गया कि शरद पवार की पार्टी संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकती है या फिर एनडीए का हिस्सा बनने की तैयारी में है। हालांकि, पार्टी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

सुप्रिया सुले ने अटकलों को बताया निराधार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने मुंबई में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट कहा कि पार्टी को परिसीमन विधेयक को लेकर न तो केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव मिला है और न ही किसी प्रकार की कोई राजनीतिक “डील” हुई है।

उन्होंने कहा कि जब विधेयक का आधिकारिक मसौदा संसद में पेश होगा, तब पार्टी उसका विस्तृत अध्ययन करेगी और 24 घंटे के भीतर अपना आधिकारिक रुख सामने रखेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि एनडीए की ओर से उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और पार्टी अपने मौजूदा राजनीतिक रुख पर कायम है।

कैसे शुरू हुईं अटकलें?

इन अटकलों की शुरुआत 8 जुलाई 2026 को हुई, जब शरद पवार मुंबई स्थित विधान भवन परिसर में महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे। बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में जाकर शिष्टाचार मुलाकात की और वहीं अपनी पार्टी के विधायकों के साथ भी बैठक की।

इसी मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि एनसीपी (एसपी) और एनडीए के बीच राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

शिवसेना (यूबीटी) ने जताई नाराजगी

महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की सहयोगी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस मुलाकात पर आपत्ति जताई। पार्टी के नेता संजय राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे के कार्यालय में बैठक करना उन लोगों को महत्व देने जैसा है, जिन्होंने महाविकास अघाड़ी सरकार गिराई थी। उन्होंने इसे “गद्दारों का महिमामंडन” बताया और कहा कि इससे गठबंधन के कार्यकर्ताओं में असहजता पैदा हुई है।

राजनीतिक गलियारों में जारी है चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय राजनीति में गठबंधनों और समीकरणों में बदलाव असामान्य नहीं है। ऐसे में एनसीपी के दोनों गुटों के भविष्य को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही दोनों गुटों के विलय की औपचारिक घोषणा हुई है।

अगर विलय हुआ तो क्या बदलेगा?

यदि भविष्य में शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों गुटों का विलय होता है और नई पार्टी एनडीए का समर्थन करती है, तो संसद का राजनीतिक गणित प्रभावित हो सकता है।

2024 के लोकसभा चुनाव के आधार पर शरद पवार गुट के पास 8 सांसद हैं, जबकि अजित पवार गुट का 1 सांसद पहले से एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में विलय के बाद नई एनसीपी के पास कुल 9 लोकसभा सांसद होंगे। यदि पूरा दल एनडीए में शामिल होता है, तो सत्तारूढ़ गठबंधन को शरद पवार गुट के 8 अतिरिक्त सांसदों का समर्थन मिल सकता है, जिससे लोकसभा में उसकी संख्या और मजबूत होगी।

राज्यसभा में भी एनसीपी के दोनों गुटों के कुल लगभग 6 से 7 सदस्य बताए जाते हैं। यदि भविष्य में वे एकजुट होकर एनडीए का समर्थन करते हैं, तो उच्च सदन में भी सत्तापक्ष की स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि, राज्यसभा में दल-बदल कानून, पार्टी व्हिप और अन्य संवैधानिक प्रावधान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

फिलहाल केवल अटकलें

राजनीतिक चर्चाओं के बावजूद मौजूदा स्थिति में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने एनडीए में शामिल होने या परिसीमन विधेयक के समर्थन को लेकर किसी भी तरह की सहमति से इनकार किया है। सुप्रिया सुले के बयान के बाद पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट है कि न तो कोई प्रस्ताव मिला है और न ही गठबंधन बदलने का कोई निर्णय लिया गया है। ऐसे में जब तक दोनों गुटों के विलय या किसी नए राजनीतिक फैसले की औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इन चर्चाओं को केवल राजनीतिक अटकलें ही माना जाएगा।



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