जस्टिस मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने कहा कि मामला करीब एक दशक से चल रहा है और अब इसे किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि विवाद से जुड़े पक्ष इससे आगे नहीं बढ़ते हैं, तो इसका देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेष अदालत के आदेश को दी थी चुनौती
विजय माल्या ने वर्ष 2020 में PMLA की विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत बैंकों को उनकी जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। माल्या की ओर से दलील दी गई थी कि उनकी संपत्तियां बैंकों को सौंपने का आदेश उचित नहीं है। माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी कई संपत्तियां जब्त की थीं। इसके बाद बैंकों को कर्ज की वसूली के लिए इन संपत्तियों के इस्तेमाल की अनुमति मिली।
‘व्यावहारिक समाधान की ओर बढ़ें’
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि कमर्शियल विवादों में सभी पक्षों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी में उलझे रहने के बजाय व्यावहारिक समाधान तलाशना चाहिए। अदालत ने ED से जांच की मौजूदा स्थिति और अब तक जब्त की गई संपत्तियों के बारे में भी जानकारी मांगी। कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब माल्या और भारतीय बैंकों के बीच कर्ज वसूली से जुड़ी कानूनी लड़ाई कई वर्षों से अलग-अलग अदालतों में चल रही है।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए गए थे माल्या
विजय माल्या भारत में बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। भारत छोड़कर ब्रिटेन चले जाने के बाद उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। इसके बाद उनकी संपत्तियों को जब्त करने और उनकी बिक्री के जरिए बैंकों के बकाये की वसूली का रास्ता खुला।
माल्या ने अपनी भगोड़ा आर्थिक अपराधी की स्थिति को भी अदालत में चुनौती दी है। वह फिलहाल ब्रिटेन में हैं और भारत लौटने के सवाल पर उनका कहना रहा है कि ब्रिटिश अदालतों से जुड़े प्रतिबंधों के कारण उनके लिए भारत लौटना संभव नहीं है।
वापसी को लेकर भी कोर्ट ने पूछा था सवाल
इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने माल्या की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उनसे पूछा था कि क्या वह भारत लौटकर अदालत के सामने पेश होने का इरादा रखते हैं। माल्या की ओर से कहा गया था कि वह फिलहाल यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि भारत कब लौट पाएंगे।
अब हाई कोर्ट की ताजा टिप्पणी से साफ है कि अदालत इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद को आगे बढ़ाने और इसके अंतिम समाधान की दिशा में ले जाना चाहती है।