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तेजस Mk1A कार्यक्रम को झटका, GE के एक F404 इंजन में तकनीकी खामी; सितंबर में होगी प्रगति की समीक्षा

Bolta Sach News
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Setback for Tejas Mk1A programme

बोलता सच,नई दिल्ली : स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL Tejas Mk1A कार्यक्रम को एक और तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को आपूर्ति किए गए छह GE F404 Engine इंजनों में से एक में तकनीकी खामी पाई गई है। कंपनी ने इस संबंध में इंजन निर्माता से संपर्क किया है और समस्या के समाधान की प्रक्रिया जारी है।

सूत्रों के अनुसार, यह कोई गंभीर या असाधारण तकनीकी विफलता नहीं मानी जा रही है। विमानन और रक्षा क्षेत्र में किसी भी नए उपकरण या प्रणाली की डिलीवरी से पहले विस्तृत परीक्षण और गुणवत्ता जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान संबंधित इंजन में एक पैरामीटर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके बाद आपूर्तिकर्ता को इसकी जानकारी दी गई।

पहले से देरी का सामना कर रहा है कार्यक्रम

तेजस Mk1A परियोजना पहले ही GE एयरोस्पेस की ओर से F404 इंजनों की धीमी आपूर्ति के कारण देरी का सामना कर चुकी है। HAL को अब तक केवल छह इंजन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से पांच उपयोग के लिए उपयुक्त बताए जा रहे हैं।

भारतीय वायुसेना को विमान की डिलीवरी शुरू होने से पहले कई महत्वपूर्ण चरण पूरे किए जाने बाकी हैं, जिनमें:

  • एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन
  • सर्टिफिकेशन प्रक्रिया
  • परीक्षण उड़ानें
  • एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (ASQR) का अनुपालन

शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय करेगा सितंबर में समीक्षा

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने जून में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की थी। बताया गया है कि सरकार ने गुणवत्ता और तकनीकी मानकों में किसी प्रकार की छूट देने से इनकार किया है।

अब सितंबर में रक्षा मंत्रालय और Hindustan Aeronautics Limited के बीच एक और समीक्षा बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में परियोजना की प्रगति का आकलन किया जाएगा और सभी तकनीकी, नियामकीय तथा प्रमाणन संबंधी आवश्यकताएं पूरी होने पर नई डिलीवरी समय-सीमा तय की जा सकती है।

जुर्माने की भी संभावना

रिपोर्टों के अनुसार, यदि समीक्षा के दौरान कोई बड़ी तकनीकी या अनुबंध संबंधी कमी सामने आती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई या आर्थिक जुर्माने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी ने ऐसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए सरकार और HAL दोनों इसकी गुणवत्ता से समझौता किए बिना जल्द से जल्द डिलीवरी शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।


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