बोलता सच,लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा के खिलाफ इलाज में कथित लापरवाही की शिकायत पर उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश जारी किए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त लखनऊ को पूरे प्रकरण की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता राजकुमार सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय और चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 में उन्हें हर्निया की समस्या के कारण केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। उनका कहना है कि चिकित्सकों ने उन्हें हर्निया ऑपरेशन की जानकारी दी थी, लेकिन सर्जरी के दौरान आंत का ऑपरेशन कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई, जिसके कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
राजकुमार सिंह का दावा है कि पहली सर्जरी के बाद उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालत में सुधार न होने पर चिकित्सकों को दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा। शिकायत के अनुसार, 1 अक्टूबर 2022 को उनकी दूसरी सर्जरी की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा और कई महीनों तक स्टोमा बैग के सहारे जीवन यापन करना पड़ा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा, बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज में हुई कथित लापरवाही के कारण उनके सामान्य जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शिकायत का संज्ञान लिया है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा, अमित कुमार घोष द्वारा 9 जून 2026 को जारी पत्र में मंडलायुक्त लखनऊ को जांच कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों और तथ्यों की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर निर्धारित समयावधि के भीतर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए।
शासन के इस कदम के बाद अब पूरे मामले की जांच प्रशासनिक स्तर पर की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि इलाज के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, जांच के आदेश के बाद संबंधित पक्षों की नजर अब मंडलायुक्त की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
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