बोलता सच,लखनऊ : अलीगंज अग्निकांड की जांच तेज होने के साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के 100 से अधिक अधिकारियों और इंजीनियरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। शासन और विशेष जांच दल (एसआईटी) की सख्ती के बाद एलडीए ने वर्ष 2014 से 2026 तक अलीगंज क्षेत्र में तैनात रहे सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची जांच एजेंसी को सौंपने की तैयारी की है।
शुक्रवार को एसआईटी ने एलडीए के अधिकारियों को तलब किया। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और एक अपर सचिव शासन के समक्ष उपस्थित हुए। बैठक में आग प्रभावित इमारत, कथित अवैध निर्माण और निगरानी में हुई लापरवाही से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी ली गई।
एसआईटी ने मांगा जवाब
एसआईटी ने एलडीए से पूछा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे पहले एसआईटी ने संपत्ति आवंटन, भवन मानचित्र स्वीकृति और अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने से संबंधित फाइलें तलब की थीं, जिन्हें एलडीए ने उपलब्ध करा दिया है।
शनिवार को होंगे बयान
जांच के अगले चरण में संपत्ति, मानचित्र और विहित प्राधिकारी से जुड़े कुछ अधिकारियों को शनिवार को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले एलडीए 2014 से 2026 के बीच अलीगंज क्षेत्र में तैनात रहे 100 से अधिक अधिकारियों और इंजीनियरों की विस्तृत सूची शासन और एसआईटी को सौंप देगा।
पहले भेजी गई थी सीमित सूची
एलडीए ने शुरुआत में केवल 19 अधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें 14 सेवानिवृत्त अधिकारी और एक दिवंगत अभियंता का नाम भी शामिल था। शासन ने इसे अपर्याप्त बताते हुए पूरे प्रशासनिक क्रम की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए पिछले 12 वर्षों में संबंधित क्षेत्र में तैनात सभी अधिकारियों और इंजीनियरों को शामिल किया गया है।
जांच के प्रमुख बिंदु
- वर्ष 2014 से 2026 तक तैनात अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका की जांच।
- अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने के कारणों की पड़ताल।
- भवन सुरक्षा और निगरानी में हुई कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करना।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए जवाबदेही और सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करना।
एसआईटी की जांच जारी है और उसके निष्कर्षों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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