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संभल में इंस्पेक्टर के मौलवी के पैर छूने का वीडियो वायरल, ट्रांसफर से जोड़कर किए गए दावे पर सामने आई सच्चाई

Bolta Sach News
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Inspector's Maulvi in ​​Sambhal

बोलता सच,संभल : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक पुलिस इंस्पेक्टर का मौलवी के पैर छूते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। वायरल वीडियो में वर्दी पहने इंस्पेक्टर सुधीर पंवार एक मौलवी के पैर छूते और उनके पास बैठते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए गए, जिनमें यह भी कहा गया कि इसी वीडियो के कारण उनका तबादला कर दिया गया।

दरअसल, इंस्पेक्टर सुधीर पंवार पहले संभल कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक (एसओ) के पद पर तैनात थे। हाल ही में उनका तबादला असमौली थाने में प्रभारी निरीक्षक के रूप में कर दिया गया, जबकि असमौली के थाना प्रभारी मोहित कुमार को संभल कोतवाली की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और तबादले को आपस में जोड़कर कई पोस्ट वायरल होने लगीं।

वायरल वीडियो को लेकर दावा किया गया कि यह चेहल्लुम जुलूस के दौरान का है। वीडियो में एक मौलवी घर के भीतर बैठे नजर आते हैं और इंस्पेक्टर सुधीर पंवार वर्दी में उनके पैर छूने के बाद उनके पास बैठ जाते हैं। इस दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और वर्दी में इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए गए।

इसी बीच, उसी दिन विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शंकर कॉलेज चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने कोतवाली का घेराव किया और करीब आधे घंटे तक हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बाद में क्षेत्राधिकारी के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

इन घटनाक्रमों के बीच पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई द्वारा किए गए प्रशासनिक फेरबदल के बाद तबादले को वायरल वीडियो से जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि, पुलिस की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई कि इंस्पेक्टर का ट्रांसफर वीडियो विवाद की वजह से किया गया है।

इस पूरे मामले पर इंस्पेक्टर सुधीर पंवार ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो वर्तमान का नहीं, बल्कि पिछले वर्ष मुहर्रम के दौरान का है। उन्होंने कहा कि वीडियो का उनके हालिया तबादले से कोई संबंध नहीं है। संभल पुलिस की ओर से भी ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें ट्रांसफर का कारण वायरल वीडियो को बताया गया हो।

फिलहाल, पुलिस अधिकारियों के अनुसार तबादला नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



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