बोलता सच,नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा करने, कागजात उछालने, सुरक्षाकर्मियों से कथित मारपीट करने और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोपी लॉ छात्र को दिल्ली की एक निचली अदालत से जमानत मिल गई है। इस मामले में गिरफ्तार दोनों कानून के छात्रों को अदालत ने राहत देते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति के अनुचित व्यवहार से सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था की गरिमा कम नहीं हो सकती।
25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर मिली जमानत
दिल्ली की न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि की अदालत ने 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। 27 जुलाई 2026 को पारित यह आदेश बुधवार को सार्वजनिक हुआ।
अदालत ने व्यवहार की निंदा भी की
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि न्यायालय में इस प्रकार का आचरण स्वीकार्य नहीं है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि आरोपी भविष्य में किसी भी अदालत में मर्यादित व्यवहार करेंगे और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा का सम्मान करेंगे।
‘संस्थागत संयम’ बनाए रखने की जरूरत
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था की प्रतिष्ठा किसी एक परेशान या बिना वकील के पेश हुए याचिकाकर्ता के अमर्यादित व्यवहार से प्रभावित नहीं होती। इसलिए निचली अदालतों को भी जमानत पर फैसला करते समय कानून के स्थापित सिद्धांतों और संस्थागत संयम का पालन करना चाहिए।
जांच पूरी होने का मिला लाभ
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में अधिकतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान है। पुलिस जांच पूरी हो चुकी है, आरोपियों से आवश्यक पूछताछ हो चुकी है और अब किसी अतिरिक्त बरामदगी या हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में आरोपी को लगातार न्यायिक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी और लखनऊ विश्वविद्यालय में कानून के तीसरे वर्ष के छात्र प्रबल प्रताप सिंह 10 जुलाई 2026 को रायबरेली निवासी दूसरे वर्ष के कानून के छात्र चंदर भान के साथ पिटीशनर-इन-पर्सन के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
आरोप है कि सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप सिंह ने अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डाला, अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, कोर्ट रूम में कागजात फेंके तथा सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भी उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देखा गया था।
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों कानून के छात्रों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। अब निचली अदालत ने कानूनी प्रावधानों के आधार पर प्रबल प्रताप सिंह को जमानत दे दी है, जबकि मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
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