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मुजफ्फरनगर की दोना फैक्टरी में कथित बंधुआ मजदूरी का मामला: मजदूरों ने सुनाई अमानवीय यातनाओं की दास्तां, मालिक फरार

Bolta Sach News
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बोलता सच,मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में संचालित एक दोना फैक्टरी में कथित बंधुआ मजदूरी के मामले ने नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। फैक्टरी से मुक्त कराए गए मजदूरों के न्यायालय में दर्ज बयानों से कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें रोजगार, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर विभिन्न राज्यों से लाया गया था, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें बंधक बनाकर जबरन काम कराया गया।
पुलिस ने अब तक चार मजदूरों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए हैं। पीड़ितों के अनुसार उन्हें प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये वेतन देने का वादा किया गया था। साथ ही मुफ्त भोजन और रहने की सुविधा का आश्वासन भी दिया गया था। हालांकि फैक्टरी पहुंचने के बाद वास्तविकता पूरी तरह अलग निकली। मजदूरों का दावा है कि उन्हें डेढ़ वर्ष तक फैक्टरी परिसर में कैद जैसी परिस्थितियों में रखा गया और लगातार काम कराया गया।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि विरोध करने या काम करने से मना करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। कई बार उन्हें कोड़ों से पीटा गया, कुत्तों से कटवाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें शरीर पर नुकीले हथियारों से दागने जैसी अमानवीय यातनाएं दी गईं। भोजन के नाम पर अक्सर सूखी रोटियां दी जाती थीं और कई बार पर्याप्त खाना भी नहीं मिलता था।
पूरे मामले का खुलासा राजस्थान निवासी मजदूर विक्रम के साहसिक प्रयास के बाद हुआ। मजदूरों के अनुसार एक दिन फैक्टरी का सुपरवाइजर शिवा शराब पीने के लिए बाहर गया हुआ था और मालिक भी मौके पर मौजूद नहीं था। इसी दौरान साथियों ने योजना बनाकर विक्रम को एक तिरपाल में छिपा दिया। मालिक के पिता के वहां से जाने के बाद विक्रम को फैक्टरी की दीवार फांदकर बाहर निकाला गया।
बताया गया कि विक्रम के भागने की जानकारी मिलते ही कुछ लोगों ने उसका पीछा किया, लेकिन वह पास के गन्ने के खेत में छिपने में सफल रहा। बाद में वह किसी तरह तितावी थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। विक्रम के फरार होने के बाद फैक्टरी में मौजूद अन्य मजदूरों की कथित रूप से पिटाई भी की गई।
पीड़ित मजदूरों ने बताया कि फैक्टरी का मुख्य गेट हमेशा बंद रखा जाता था। केवल सामान की आवाजाही या संचालकों के आने-जाने के समय ही उसे खोला जाता था। गेट पर ‘कुत्तों से सावधान’ का बोर्ड लगा हुआ था, जिससे बाहरी लोगों की आवाजाही भी सीमित रहती थी। कई मजदूरों ने कहा कि उन्हें महीनों तक यह भी नहीं पता था कि वे किस गांव या इलाके में रह रहे हैं। एक मजदूर ने बताया कि वह आठ महीने से वहां काम कर रहा था, लेकिन उसे अपने ठिकाने का नाम तक मालूम नहीं था।
पुलिस ने मजदूर रंजीत, साहिल, विक्रम और जगदीश के बयान न्यायालय में दर्ज कराए हैं। बिहार निवासी संतोष और उज्ज्वल को भी बयान के लिए ले जाया गया था, लेकिन समयाभाव के कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। अन्य मजदूरों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है।
इस बीच बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड समेत कई राज्यों से मजदूरों के परिजन तितावी थाने पहुंच रहे हैं। पुलिस ने सभी परिवारों को सूचना दे दी है और मजदूरों को सुरक्षित उनके घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
मामले में फैक्टरी मालिक अंकित बालियान और उसके एक सहयोगी की तलाश जारी है। दोनों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। एसपी देहात अक्षय संजय महाडीक ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि चार मजदूरों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए जा चुके हैं और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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