प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत में कौशल अंतराल (स्किल गैप) गंभीर चुनौती बना हुआ है। उनके अनुसार देश के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भविष्य का लाभ उठाने का अवसर है, लेकिन नौकरी के लिए तैयार प्रतिभाओं के मामले में भारत पीछे है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं और कौशल विकास को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
सूचकांक में भारत की स्थिति
जारी रिपोर्ट के अनुसार, कार्यबल की तैयारी के मामले में भारत 74वें और मानव पूंजी के मामले में 73वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्थिति देश की तेज आर्थिक वृद्धि और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार कार्यबल के बीच मौजूद अंतर को दर्शाती है।
हालांकि समग्र प्रदर्शन के आधार पर भारत ने वैश्विक स्तर पर 13वां स्थान हासिल किया है। भारत को 100 में से 89.4 अंक मिले हैं। इस सूची में अमेरिका पहले, ऑस्ट्रेलिया दूसरे और ब्रिटेन तीसरे स्थान पर है। जर्मनी चौथे, कनाडा पांचवें और दक्षिण कोरिया छठे स्थान पर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में भारत सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश रहा। वहीं, आर्थिक क्षमता श्रेणी में भारत ने 100 में से 100 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कौशल पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से समर्थित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से स्वचालित कार्यों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक होगा। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ऐसे कार्यों की संख्या अधिक है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता कर्मचारियों का स्थान लेने के बजाय उनकी उत्पादकता बढ़ाने का काम करती है।
प्रियंका चतुर्वेदी की टिप्पणी के बाद कौशल विकास, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।