बोलता सच,लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के बाद ही विवाह करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई युवक-युवतियां जल्दबाजी में घर छोड़कर चले जाते हैं, जिसके कारण कई सामाजिक और पारिवारिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को अपने भविष्य और जिम्मेदारियों को समझते हुए सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।
राज्यपाल लखनऊ में आयोजित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से खुलकर संवाद किया और जीवन से जुड़े कई अनुभव साझा किए।
आत्मनिर्भर बनने के बाद करें विवाह
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में कई लड़के और लड़कियां बिना भविष्य की योजना बनाए घर छोड़कर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं और बाद में बच्चों की जिम्मेदारी परिवार स्वीकार नहीं करता। ऐसे बच्चे कई बार बालगृहों तक पहुंच जाते हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेने चाहिए। पहले शिक्षा पूरी करें, अपने पैरों पर खड़े हों और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, उसके बाद ही विवाह जैसे फैसले लें।
बेटे का उदाहरण देकर दी सीख
राज्यपाल ने अपने परिवार का उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनका बेटा उच्च शिक्षा के लिए बेंगलुरु गया था, तब उन्होंने उससे कहा था कि यदि उसे कोई लड़की पसंद आए तो वह उन्हें बताए, वे उसकी शादी करा देंगी। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने ऐसा नहीं किया, लेकिन यदि किसी छात्र या छात्रा को कोई पसंद है तो पहले अपना करियर बनाएं और आत्मनिर्भर बनें, उसके बाद परिवार की सहमति से विवाह करें।
“मैं लव मैरिज की विरोधी नहीं हूं”
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्पष्ट किया कि वह प्रेम विवाह (लव मैरिज) के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका केवल इतना कहना है कि विवाह से पहले युवाओं को आर्थिक और मानसिक रूप से सक्षम बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में जिम्मेदारियों को समझते हुए सही समय पर लिए गए फैसले व्यक्ति और परिवार दोनों के लिए बेहतर साबित होते हैं।
शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण कार्यों पर जताई चिंता
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई संस्थानों में भवन तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी डिजाइन व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप नहीं होती।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई भवनों में बिजली के स्विच ऐसे स्थानों पर लगाए गए हैं, जहां उनका उपयोग करना असुविधाजनक होता है। इसी प्रकार कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी के नल और शौचालय बच्चों की ऊंचाई के अनुरूप नहीं बनाए गए हैं, जिससे छोटे बच्चों को परेशानी होती है।
आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि भविष्य में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ-साथ उपयोगिता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने छात्रावासों में आधुनिक रसोई (मॉडर्न किचन) और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आरओ प्लांट स्थापित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी आधारभूत सुविधाएं विकसित की
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