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राम मंदिर दान चोरी मामला: अखिलेश यादव और निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद, मानहानि नोटिस तक पहुंची लड़ाई

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Ram Temple donation theft case

बोलता सच,लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला मानहानि के नोटिस तक पहुंच गया है।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट को रीपोस्ट किया। उस पोस्ट में बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के राम मंदिर दान चोरी मामले के आरोपी बताए जा रहे टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच कथित संपर्क का दावा किया गया था। पोस्ट में ‘टीपू’ शब्द का भी इस्तेमाल किया गया, जिसे समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव से जोड़कर देखा।

सपा नेता ने भेजा मानहानि का नोटिस

मंगलवार को समाजवादी अधिवक्ता सभा के अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल ने निशिकांत दुबे को कानूनी मानहानि नोटिस भेजा। नोटिस में आरोप लगाया गया कि भाजपा सांसद ने जानबूझकर समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की छवि धूमिल करने तथा उनके प्रति नफरत फैलाने के उद्देश्य से आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री साझा की। नोटिस में निशिकांत दुबे से दो सप्ताह के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।

निशिकांत दुबे का पलटवार

मानहानि नोटिस मिलने के बाद निशिकांत दुबे ने बुधवार को सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित अधिवक्ता को कानूनी उत्तर भेज दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने पूछा है कि संबंधित अधिवक्ता की व्यक्तिगत मानहानि किस प्रकार हुई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “टीपू” नाम किस सरकारी दस्तावेज में दर्ज है। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और उसके नेता उन्हें अनावश्यक रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उन्होंने कानूनी खर्च की भरपाई का दावा करने की भी बात कही।

अखिलेश यादव ने पहले दिया था अल्टीमेटम

इससे पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर निशिकांत दुबे को संबोधित करते हुए उनकी पोस्ट हटाने के लिए 10 मिनट का समय दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि पोस्ट नहीं हटाई गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में भाजपा सांसद के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। लखनऊ में सपा नेता मनोज काका ने भी पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी।

कौन है टिन्नू यादव?

राम मंदिर दान राशि की कथित चोरी के मामले में टिन्नू यादव का नाम आरोपियों में सामने आया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से उसे इस कथित साजिश का प्रमुख आरोपी बताया गया है। यह भी कहा गया है कि वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का चालक और करीबी सहयोगी रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट्स द्वारा यह दावा किया गया कि टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई थी।

आधिकारिक पुष्टि नहीं

हालांकि, इन दावों की अब तक किसी जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में अखिलेश यादव और टिन्नू यादव के बीच किसी कथित फोन संपर्क या संबंध का उल्लेख नहीं किया गया है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी प्रक्रिया दोनों स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इस मामले में तथ्यात्मक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


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