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VB-G RAM G एक्ट पर एसबीआई रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, राज्यों को नुकसान नहीं बल्कि 17 हजार करोड़ का फायदा

Bolta Sach News
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SBI on VB-G RAM G Act
बोलता सच,नई दिल्ली। मनरेगा की जगह लाए गए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G) एक्ट को लेकर जहां विपक्ष लगातार राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ का आरोप लगा रहा है, वहीं अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक अहम रिपोर्ट ने इन आशंकाओं को खारिज कर दिया है। एसबीआई के आकलन के अनुसार, यह नया कानून राज्यों के लिए नुकसानदेह नहीं बल्कि उन्हें करीब 17,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ दिला सकता है।
एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में पिछले सात वर्षों के दौरान मनरेगा के तहत राज्यों को मिले औसत आवंटन का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए कानून के तहत केंद्र की ओर से राज्यों को मिलने वाले हिस्से में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है। यह आकलन समानता और दक्षता के दोहरे सिद्धांतों पर आधारित सात प्रमुख पैरामीटर पर किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पिछले सात वर्षों के औसत आवंटन से तुलना की जाए, तो अधिकतर राज्य इस नए फ्रेमवर्क में फायदे में रहेंगे। एसबीआई का मानना है कि केंद्र–राज्य फंडिंग अनुपात में बदलाव को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह वास्तविकता से परे है।
दरअसल, VB-G RAM G एक्ट में केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग का अनुपात 60:40 तय किया गया है, जिसमें 40 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्यों की होगी। इसी प्रावधान को लेकर सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। एसबीआई का कहना है कि इस बदलाव को लेकर यह तर्क देना कि इससे राज्यों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा, पूरी तरह गलतफहमी पर आधारित है।
एसबीआई के विश्लेषण में वित्त वर्ष 2019 से 2025 तक (वित्त वर्ष 2021 को छोड़कर) मनरेगा के तहत मिले औसत आवंटन की तुलना नए कानून के संभावित आवंटन से की गई है। इसके अनुसार, केवल दो राज्यों को मामूली नुकसान हो सकता है, जबकि अधिकांश राज्यों को लाभ होगा। सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को मिलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात का स्थान है।
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र में पारित होने के बाद VB-G RAM G बिल कानून बन चुका है। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को अब सालाना 100 दिनों की जगह 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी, जिससे ग्रामीण आजीविका को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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