बोलता सच,नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान और नवाचार पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अप्रत्याशित नवाचार (Unpredictable Innovation) ही किसी देश को रणनीतिक बढ़त दिला सकता है।
रक्षा मंत्री ने प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय ‘नॉर्थ टेक संगोष्ठी’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी द्वारा किया गया था। इसमें रक्षा कर्मियों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ ही वर्षों में युद्ध पारंपरिक टैंक और मिसाइलों से आगे बढ़कर ड्रोन, सेंसर और उन्नत तकनीकी उपकरणों पर आधारित हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सामान्य दिखने वाली वस्तुएं भी घातक हथियार में बदल सकती हैं, जैसा कि लेबनान और सीरिया में हुए पेजर हमलों से स्पष्ट हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्ध प्रयोगशालाओं में तैयार हो रहे हैं। जो देश तकनीकी क्रांति को सबसे तेजी से अपनाएगा, वही भविष्य में निर्णायक बढ़त हासिल करेगा।
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ (DRDO) के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि DRDO अब उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रहा है और अपने पेटेंट तक निशुल्क पहुंच देने की नीति अपनाई है, जिससे भारतीय उद्योगों की क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि DRDO की परीक्षण सुविधाएं उद्योगों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं, जिनका हर साल सैकड़ों कंपनियां अनुसंधान और विकास के लिए उपयोग कर रही हैं।
राजनाथ सिंह ने उद्योगों से अपील की कि वे निर्देशित ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक तकनीक, जलमग्न और अंतरिक्ष क्षेत्र जागरूकता, क्वांटम तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस दिशा में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।
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