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सोहगीबरवा जंगल बन रहा बाघों का नया सुरक्षित बसेरा, छोड़े गए चारों बाघ स्वस्थ और सक्रिय

Bolta Sach News
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Sohagibarwa is becoming a forest
बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले स्थित सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग तेजी से बाघों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक आवास के रूप में उभर रहा है। यहां की अनुकूल जलवायु, पर्याप्त भोजन और जल स्रोतों के कारण एक वर्ष से अधिक समय पहले छोड़े गए चारों बाघ पूरी तरह सुरक्षित हैं और जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। अब वन विभाग इनके लिए प्राकृतिक आवास को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
करीब 48,820 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग बेंत के घने जंगलों, विस्तृत घास के मैदानों (ग्रासलैंड) और नारायणी नदी से समृद्ध है। यह क्षेत्र बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के चितवन टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर भी उपलब्ध है।
वर्तमान में यह जंगल नीलगाय, हिरन, जंगली सुअर, खरगोश, जंगली भैंस समेत कई छोटे वन्यजीवों का प्रमुख निवास स्थान है, जो बाघों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराते हैं।
बाघों के प्रवास और नए आवास की संभावनाओं का आकलन करने के लिए अप्रैल 2025 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनुमति से खीरी से एक बाघिन और उसके दो शावकों को यहां छोड़ा गया था। इसके अलावा बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भी एक बाघ को सोहगीबरवा लाया गया। सभी बाघ सुरक्षित हैं और जंगल में सफलतापूर्वक शिकार कर रहे हैं।
हाल ही में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा बाघ गणना के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में चारों बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वस्थ गतिविधियों की पुष्टि हुई है।
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ सुरवे निरजन ने बताया कि क्षेत्र बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास साबित हो रहा है और यहां छोड़े गए सभी बाघ सुरक्षित वातावरण में विचरण कर रहे हैं। वहीं, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने कहा कि बाघों के लिए प्राकृतिक आवास को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से विशेष रूप से ग्रासलैंड का विस्तार किया जा रहा है। इससे छोटे वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी और बाघों के लिए भोजन एवं आवास दोनों की स्थिति और बेहतर होगी।

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