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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा- विधायक या एमएलसी नहीं, फिर 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बने हैं दीपक प्रकाश?

Bolta Sach News
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The Supreme Court asked the Bihar government

बोलता सच,नई दिल्ली/पटना: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार सरकार से पूछा कि जब दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के, तो वह छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर किस संवैधानिक आधार पर बने हुए हैं।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मंत्री बनाए जाने के बाद छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दीपक प्रकाश अब तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं बने हैं। ऐसे में उनका मंत्री पद पर बने रहना संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा संवैधानिक आधार

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि यह पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी प्रश्न है। उन्होंने बिहार सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि दीपक प्रकाश किस संवैधानिक प्रावधान के तहत छह महीने से अधिक समय तक मंत्री बने हुए हैं। अदालत ने पूछा कि उन्हें मंत्री पद पर बनाए रखने का वैधानिक आधार क्या है।

जनहित याचिका में नियुक्ति को दी गई चुनौती

यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता और व्हिसलब्लोअर राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में नई बिहार सरकार के गठन के बाद दीपक प्रकाश की दोबारा मंत्री नियुक्ति की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इस मामले में बिहार सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है।

अनुच्छेद 164(4) का उठाया गया सवाल

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो विधायक या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, उसे अधिकतम छह महीने तक मंत्री बनाया जा सकता है। इस अवधि के भीतर उसे किसी एक सदन का सदस्य निर्वाचित या मनोनीत होना अनिवार्य होता है, अन्यथा उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब तलब करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि दीपक प्रकाश को छह महीने से अधिक समय तक मंत्री बनाए रखने का संवैधानिक आधार क्या है।



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