कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)। जिले में शनिवार को प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एक परिवार के मकान का बंटवारा कराया। इस कार्रवाई के दौरान परिवार के छोटे बच्चों से लेकर 80 वर्ष की बुजुर्ग महिला और उनकी बहुएं तक प्रभावित हुईं। मामला पथरदेवा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़ा है, जिसके मुखिया राजेंद्र बाबू हैं। न्यायालय से पारित आदेश के तहत प्रशासन की मौजूदगी में मकान को तीन हिस्सों में बांटा गया।
परिवार का दर्द सामने आया
कार्रवाई के दौरान परिवार के अंदर गहरा तनाव देखने को मिला। राजेंद्र बाबू के अधिवक्ता बेटे विनायक प्रबल ने भावुक होकर कहा कि उनका परिवार इन दिनों अत्यंत त्रासदीपूर्ण और अमानवीय परिस्थितियों से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का पालन तो किया, लेकिन परिवार की सामाजिक और मानसिक परिस्थितियों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया।
विनायक ने कहा कि उनके पिता मानसिक एवं सामाजिक असंतुलन की स्थिति में हैं और कुछ असामाजिक तत्वों के बहकावे में आकर परिवार को निरंतर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि “दर-दर भटकने और अपमान झेलने से बेहतर है कि मैं अपने पूरे परिवार के लिए सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति मांग लूं। यह अन्याय हमें तोड़ रहा है और अब जीने की कोई उम्मीद नहीं बची।”
न्यायालय से प्रशासन तक मामला
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, मकान बंटवारे का विवाद लंबे समय से चला आ रहा था। परिवार के एक सदस्य ने अपने भरण-पोषण के लिए न्यायालय में मुकदमा दायर किया था। इस मामले में 11 मार्च को आदेश आया था। लेकिन आदेश के बावजूद अनुपालन न होने पर वादी ने उच्च न्यायालय की शरण ली और जिला मजिस्ट्रेट को पक्षकार बनाया। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मकान का बंटवारा कराया जाए।
एसडीएम सदर ने बताया कि पिछले महीने वादी ने प्रशासन के सामने शपथपत्र देकर कहा था कि या तो मकान का बंटवारा करा दिया जाए या पूरा परिसर उन्हें सौंप दिया जाए। इसी क्रम में शनिवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और तीनों हिस्सेदारों को बुलाया गया। काफी बातचीत और विवाद के बाद अंततः तीनों ने आपसी सहमति से बंटवारा स्वीकार कर लिया।
निशानदेही और अगली प्रक्रिया
प्रशासन ने मौके पर पिलर लगाकर तीनों हिस्सों की निशानदेही करा दी। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में दीवार खड़ी कर मकान को औपचारिक रूप से तीन हिस्सों में विभाजित कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक पक्ष अपने हिस्से में स्वतंत्र रूप से रह सकेगा। प्रशासन ने पूरी कार्यवाही की रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय को भेज दी है।
प्रशासन की सफाई
एसडीएम सदर ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि अब मकान से जुड़ा विवाद समाप्त हो गया है और सभी हिस्सेदार अपने-अपने हिस्से में रहने लगेंगे। किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं हुआ है।
विवाद का असर
हालांकि, परिवार के भीतर गहरे तनाव और अवसाद की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। अधिवक्ता बेटे द्वारा सामूहिक इच्छा मृत्यु की मांग जैसे बयान ने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अदालत के आदेश का पालन करना प्रशासन की मजबूरी थी, लेकिन पारिवारिक स्तर पर इस बंटवारे ने रिश्तों में गहरी दरार डाल दी है।
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