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सोशल मीडिया पर एआई कंटेंट को लेकर सख्त हुआ केंद्र, वाटरमार्क और तीन घंटे में कार्रवाई अनिवार्य

Bolta Sach News
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बोलता सच,नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत अब एआई-जनित (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार) सामग्री पर स्पष्ट और पहचान योग्य लेबल या वाटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा। सरकार ने साफ किया है कि एक बार एआई लेबल या मेटा डेटा लगाए जाने के बाद उसे हटाया, बदला या दबाया नहीं जा सकेगा।

सरकार के अनुसार, मानव निर्मित या कृत्रिम रूप से तैयार की गई किसी भी डिजिटल सामग्री—चाहे वह ऑडियो हो, वीडियो, फोटो या ग्राफिक—को स्पष्ट रूप से पहचान योग्य वाटरमार्क के साथ प्रदर्शित करना होगा। इसमें वह सामग्री भी शामिल है, जिसे कंप्यूटर या किसी अन्य डिजिटल संसाधन से बनाया, संशोधित या बदला गया हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई यूजर एआई-जनित सामग्री का गैरकानूनी इस्तेमाल न करे। यदि कोई यूजर अवैध, अश्लील, धोखाधड़ी से जुड़ी या बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री बनाता या साझा करता है, तो प्लेटफॉर्म्स को उसे रोकने के लिए स्वचालित तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को हर तीन महीने में कम से कम एक बार चेतावनी देना अनिवार्य होगा कि नियमों के उल्लंघन पर दंड या सजा हो सकती है। नियम तोड़ने की स्थिति में यूजर का अकाउंट निलंबित किया जा सकता है या उसकी सामग्री हटाई जा सकती है।
सरकार ने कार्रवाई की समयसीमा भी सख्त कर दी है। पहले जहां 36 घंटे में सूचना देना जरूरी था, अब नियमों के उल्लंघन की जानकारी तीन घंटे के भीतर देना अनिवार्य होगा। उल्लंघन पाए जाने पर प्लेटफॉर्म्स को तुरंत उचित कार्रवाई करनी होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल मीडिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि यूजर्स आसानी से समझ सकें कि कौन-सी जानकारी वास्तविक है और कौन-सी कृत्रिम रूप से बनाई गई है।

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