शुक्रवार को अधिवेशन की जानकारी देते हुए शिया धर्मगुरु और बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि बैठक में करीब 13 महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिवेशन में देश में कॉमन सिविल कोड लागू करने के प्रस्ताव, नफरत फैलाने वाले भाषणों और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी उपायों पर चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा वक्फ बोर्डों में व्याप्त भ्रष्टाचार, वक्फ संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री और वक्फ संशोधन अधिनियम 2024 से जुड़े मुद्दों को भी बैठक में उठाया जाएगा। मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि हिजाब पर किसी भी तरह की पाबंदी के विरोध में प्रस्ताव लाने पर भी विचार किया जाएगा।
अधिवेशन में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। मौलाना ने बताया कि सऊदी अरब के मदीना स्थित जन्नत-उल-बकी में रौजों के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर विशेष प्रस्ताव रखा जाएगा। साथ ही सच्चर कमेटी की तर्ज पर शिया मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए अलग आयोग गठित किए जाने की मांग पर भी विचार होगा।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए सरकार द्वारा तय हिस्सेदारी में शिया मुसलमानों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में भाग देने, आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर नौकरियों में आरक्षण और देश की संसद व विधानसभाओं में शिया समाज के प्रतिनिधित्व की कमी जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा की जाएगी।
अधिवेशन में सामाजिक सुधार से जुड़े प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। विशेष रूप से शादी-ब्याह और गमी के अवसरों पर होने वाले फिजूलखर्च को रोकने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही भारत और दुनिया भर में फैले आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए उसे रोकने के लिए प्रस्ताव पारित करने की योजना है।
मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि धार्मिक और प्रचलित शिक्षा में सुधार, शिया समाज की तरक्की तथा इस्लाम की सही और मूल शिक्षाओं—जो पैगंबर मोहम्मद (स.अ.) और उनके परिवार की शिक्षाओं पर आधारित हों—को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने जैसे विषय भी अधिवेशन के एजेंडे में शामिल हैं।