बोलता सच : दिल्ली दंगों के आरोप में पिछले पांच वर्षों से जेल में बंद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने अब राजनीति में उतरने की इच्छा जताई है। उन्होंने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर करते हुए दिल्ली की एक अदालत में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। अदालत में दायर इस याचिका में उन्होंने कहा है कि उन्हें बिहार जाकर चुनाव प्रचार और नामांकन दाखिल करने की अनुमति दी जाए।
शरजील इमाम का नाम 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल है। फरवरी 2020 में हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और करीब 700 लोग घायल हुए थे। हिंसा के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं। इस मामले में शरजील इमाम समेत कई अन्य आरोपियों — जिनमें उमर खालिद भी शामिल हैं — पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
शरजील इमाम पर आरोप है कि उन्होंने सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के खिलाफ देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण दिए, जिसके चलते हिंसा भड़क उठी। जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने अपने भाषणों से समुदाय विशेष के लोगों को भड़काने का काम किया, जिससे दिल्ली और अन्य हिस्सों में तनाव बढ़ा। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे जेल में ही बंद हैं।
हालांकि, शरजील इमाम ने हमेशा अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी को हिंसा के लिए उकसाया नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन किया था। उन्होंने अदालत में यह भी दलील दी है कि उनके भाषणों को गलत संदर्भ में पेश किया गया। अब, राजनीति में कदम रखने की इच्छा के साथ उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए ताकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकें।
अदालत ने उनकी याचिका पर फिलहाल सुनवाई की तारीख तय की है। माना जा रहा है कि इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत यह देखेगी कि क्या गंभीर आरोपों में बंद आरोपी को चुनाव लड़ने के लिए अस्थायी जमानत दी जा सकती है या नहीं।
बता दें कि शरजील इमाम मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और बाद में जेएनयू से इतिहास में एम.फिल किया। छात्र राजनीति के दौरान वे सक्रिय रहे और सीएए-एनआरसी के खिलाफ आंदोलनों में प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर अदालत उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति देती है, तो यह बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव में एक दिलचस्प मोड़ साबित हो सकता है। वहीं, कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यूएपीए जैसे कड़े कानून के तहत बंद आरोपी के लिए अंतरिम जमानत पाना आसान नहीं होगा।
फिलहाल, अदालत के आदेश का इंतजार है। यह देखना बाकी है कि क्या शरजील इमाम को जेल से बाहर निकलकर बिहार की राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करने का मौका मिलेगा या नहीं।
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