अथर्व त्यागी ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव हिंदू धर्म की ओर था। उन्हें मंदिर जाना और पूजा-पाठ करना पसंद था, लेकिन मुस्लिम होने के कारण कई बार उन्हें असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अधिकतर मित्र हिंदू हैं और वे स्वयं बजरंग बली के भक्त रहे हैं। इन्हीं भावनाओं के चलते उन्होंने सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया।
सोमवार को वे वाराणसी पहुंचे, जहां अस्सी घाट पर गंगा स्नान के साथ पंचगव्य स्नान कराया गया। इसके बाद 21 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच शुद्धिकरण संस्कार, हवन-पूजन और नामकरण किया गया। इस दौरान उनके बाल भी मुंडवाए गए और तिलक लगाकर सनातन धर्म में विधिवत प्रवेश कराया गया। उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन कर शिवलिंग का अभिषेक भी किया।
अथर्व त्यागी ने 20 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथनामा लिखकर अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ घर वापसी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब वे हिंदू रीति-रिवाज से जीवन व्यतीत करेंगे और पूजा-पाठ करेंगे। उन्होंने अपना गोत्र कश्यप बताया और कहा कि उनका निर्णय पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया है।
पूजन कराने वाले ब्राह्मण आलोक योगी ने बताया कि धर्म परिवर्तन से पहले शुद्धिकरण संस्कार कराया गया, जिसके बाद शास्त्रीय विधि के अनुसार नामकरण किया गया। पूरी प्रक्रिया वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराई गई।
अथर्व त्यागी ने बताया कि वे पेशे से इंजीनियर हैं और सागर जिले में उनका परिवार रहता है, जो अभी भी मुस्लिम धर्म का पालन करता है। उन्होंने कहा कि उनका मन उस समय आहत हुआ, जब दोस्तों के साथ महाकाल मंदिर जाने पर उन्हें प्रवेश नहीं मिला। इसी घटना ने उन्हें अपने जीवन का मार्ग तय करने के लिए प्रेरित किया। अब वे स्वतंत्र रूप से सनातन परंपरा के अनुसार जीवन जीना चाहते हैं।