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मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखी, बंगाल चुनाव से पहले शुरू हुई राजनीतिक जंग

Bolta Sach News
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Babri Masjid in Murshidabad

बोलता सच,पश्चिम बंगाल : टीएमसी से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रख दी। 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा विशाल मंच, हजारों की भीड़, कुरान की तिलावत और नारों के बीच नई बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया गया। “अल्लाह हू अकबर” की गूंज के साथ समर्थक ईंटें लेकर पहुंचे, जबकि मंच से “बाबरी मस्जिद जिंदाबाद” के नारे भी लगे। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण का मंच भी तैयार हो गया। 6 दिसंबर वही तारीख है, जब 33 साल पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी। कबीर पहले ही ऐलान कर चुके थे कि मुर्शिदाबाद की नई बाबरी मस्जिद वैसी ही होगी, जैसी अयोध्या में कभी हुआ करती थी।

बीजेपी ने बताया टीएमसी का नाटक

शिलान्यास समारोह के मंच से हुमायूं कबीर ने कहा कि वह 2024 में ही बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा कर चुके थे। अपने भाषण में उन्होंने मीर बांकी का भी जिक्र किया। इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। टीएमसी ने इसे सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश बताया, जबकि पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने इसे टीएमसी का नाटक कहकर आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने संदेश भेजने की जो भी जरूरत थी, वह पूरी हो चुका है और अब निष्कासन का खेल खेला जा रहा है।

अमित मालवीय ने बताया खतरा

बीजेपी नेता केशव मौर्य ने दावा किया कि यह टीएमसी की चाल है और अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी तो मस्जिद की एक-एक ईंट उखाड़ दी जाएगी। वहीं बीजेपी के बंगाल प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि NH-12, जिसे उत्तर बंगाल की लाइफलाइन माना जाता है, के पास मस्जिद बनाना खतरनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी राजनीतिक रणनीति के तहत पुलिस सुरक्षा में यह निर्माण करवा रही है।

हुमायूं को बताया बीजेपी का एजेंट

कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने हुमायूं कबीर को बीजेपी का एजेंट करार दिया। उन्होंने कहा कि कबीर ने 2019 में बीजेपी से चुनाव लड़ा था, और अब वह देश में नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तंज करते हुए पूछा कि अगर वह इतने बड़े मुसलमान हैं, तो 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा? क्या भारतीय पार्टी की नीतियां उन्हें तब समझ में नहीं आ रही थीं?

मुस्लिम संगठन ने नीयत पर उठाए सवाल

इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन ने भी पूर्व टीएमसी विधायक की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मस्जिद कानूनी जगह पर बनाई जा रही है और उसका नक्शा स्वीकृत है तो किसी भी धर्म के लोग उसे बना सकते हैं। लेकिन सिर्फ बाबर के नाम पर मस्जिद बनाना राजनीतिक उद्देश्य दर्शाता है, जो असली धार्मिक भावनाओं को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि यदि कबीर मस्जिद बनाना चाहते हैं तो नाम को मुद्दा न बनाएं। ध्यान रहे कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अप्रैल 2026 में संभावित हैं।


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