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जीजा की डिग्री पर डॉक्टर बना इंजीनियर: ललितपुर फर्जीवाड़े में चौंकाने वाले खुलासे

Bolta Sach News
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Became a doctor on brother-in-law's degree

बोलता सच,झाँसी/ललितपुर: मेडिकल कॉलेज में जीजा की एमबीबीएस और एमडी डिग्री के सहारे चिकित्सक बना इंजीनियर अभिनव सिंह का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस फर्जीवाड़े की शिकायत करीब पांच महीने पहले 20 जुलाई को अमेरिका में रहने वाले उसके जीजा डॉ. राजीव गुप्ता ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब एनएमसी) को ई-मेल के जरिए की थी, लेकिन उस समय शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य मयंक शुक्ला का कहना है कि शिकायत गलत ई-मेल आईडी पर भेजी गई थी, इसी कारण उसका संज्ञान नहीं लिया जा सका। हालांकि अब गिरफ्तारी के बाद एक के बाद एक गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं।

तीन साल तक एनएचएम में तैनात रहा आरोपी

अभिनव सिंह की नियुक्ति लगभग तीन वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत एनसीडी सेल में कार्डियोलॉजी एवं जनरल मेडिसिन के पद पर हुई थी। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की चयन समिति भी उसके फर्जी दस्तावेजों को पहचानने में नाकाम रही।

अमेरिका से की गई थी पहचान चोरी की शिकायत

अमेरिका के टेक्सास स्थित बेल्टन शहर में रहने वाले डॉ. राजीव गुप्ता ने अपनी शिकायत में बताया था कि उन्होंने 1993 में कोलकाता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस, उसी वर्ष मेडिकल रजिस्ट्रेशन और 1993 से 1996 तक एएमयू से एमडी (मेडिसिन) की पढ़ाई की। इसके बाद 1997-98 में एएमयू में रजिस्ट्रारशिप की और 1999 में अमेरिका चले गए। वर्तमान में वे वहां इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं और अमेरिकी नागरिक भी हैं।

डॉ. राजीव ने आरोप लगाया था कि अभिनव सिंह उनकी पहचान और डिग्रियों का दुरुपयोग कर ललितपुर और मध्य प्रदेश के खुरई में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस कर रहा है। इसकी जानकारी उन्हें एक परिचित के माध्यम से मिली थी।

फर्जी ई-मेल से जुड़ा मिला रजिस्ट्रेशन

डॉ. राजीव ने एनएमसी को भेजे ई-मेल में बताया था कि जब उन्होंने वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन देखा, तो वह guptarajjv13@gmail.com नाम की ई-मेल आईडी से जुड़ा पाया गया, जो उनकी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।

गिरफ्तारी के बाद तेज हुई जांच

बहनोई के नाम और चिकित्सकीय दस्तावेजों का उपयोग कर मेडिकल कॉलेज में नौकरी करने वाले आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अभिनव सिंह कैसे खुद को डॉ. राजीव गुप्ता के रूप में स्थापित करने में सफल रहा और इस पूरे प्रकरण में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं। जांच टीम मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

इसी तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामनरेश सोनी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। तहरीर में बताया गया कि 10 दिसंबर को डॉ. सोनाली सिंह ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके भाई अभिनव सिंह ने उनके पति की डिग्रियां और पहचान चुराकर मेडिकल कॉलेज में नौकरी हासिल की।

जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने पुष्टि की कि आरोपी ने फर्जी एमबीबीएस, एमडी डिग्री, आधार कार्ड और अन्य कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जिला सीसीयू एवं कैंसर यूनिट में संविदा पर विशेषज्ञ के पद पर नौकरी प्राप्त की।

मरीजों की जान से किया खिलवाड़

तहरीर में यह भी उल्लेख है कि बिना किसी वैध योग्यता और अनुभव के आरोपी ने गंभीर हृदय रोगियों का उपचार किया, जिससे मरीजों की जान को खतरे में डाला गया। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।


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