बोलता सच,भागलपुर : देशभर में जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी महंगे कोचिंग संस्थानों तक सीमित होती जा रही है, वहीं भागलपुर के आदमपुर मोहल्ले में एक शख्स बिना किसी फीस के सैकड़ों युवाओं का भविष्य संवार रहा है। यह कहानी है 45 वर्षीय गोपाल कृष्ण झा की, जो बांस की बनी झोपड़ी में चल रहे ‘आशीर्वाद नि:शुल्क शिक्षण संस्थान’ के जरिए 300 से अधिक छात्रों को सरकारी नौकरी की तैयारी करा रहे हैं।
कौन हैं गोपाल कृष्ण झा
गोपाल कृष्ण झा एक सरकारी बीमा कंपनी में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) से स्नातक की पढ़ाई की। पढ़ाई के दिनों में ही उन्होंने समाज को कुछ लौटाने का संकल्प लिया और उसी सोच से ‘आशीर्वाद नि:शुल्क शिक्षण संस्थान’ की नींव पड़ी। आज वह हफ्ते में पांच दिन बिना किसी शुल्क के छात्रों को पढ़ाते हैं।
दंगों के बाद हालात से जुड़ी शुरुआत
इस संस्थान की कहानी भागलपुर के सांप्रदायिक दंगों के बाद के दौर से जुड़ी है। दंगों के बाद कई छात्र बेघर हो गए थे और TMBU के छात्रों को सदर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। वहीं टूटे-फूटे हॉल में पढ़ाई शुरू हुई। गोपाल कृष्ण झा और उनके दोस्तों ने न सिर्फ खुद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, बल्कि दूसरे छात्रों को भी पढ़ाना शुरू किया।
अस्पताल से झोपड़ी तक का सफर
बाद में सरकारी आदेश के चलते अस्पताल परिसर खाली करना पड़ा। इसी दौरान गोपाल कृष्ण झा को सरकारी नौकरी मिल गई, लेकिन पढ़ाने का सिलसिला नहीं रुका। आदमपुर में पिता द्वारा खरीदी गई जमीन पर संसाधनों की कमी के चलते उन्होंने बांस की झोपड़ी बनाकर पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में छात्रों से केवल प्रश्न पत्रों की फोटोकॉपी के लिए नाममात्र की राशि ली जाती थी।
पुराने छात्र बने शिक्षक
जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ी, संस्थान में प्रवेश के लिए एंट्रेंस टेस्ट शुरू किया गया। शिक्षकों के लिए धन न होने के कारण, जो छात्र सरकारी नौकरी में चयनित हो गए, वही लौटकर संस्थान में पढ़ाने लगे। इस पहल से अब तक कई सरकारी अधिकारी निकल चुके हैं।
छात्रों की जुबानी सफलता की कहानी
कटिहार के डिप्टी कलेक्टर नैमिश कुमार अपनी सफलता का श्रेय इसी संस्थान को देते हैं। उनका कहना है कि संसाधनों की कमी के बावजूद गोपाल सर ने उन्हें सही दिशा दी। वहीं, गरीब परिवार से आने वाली छात्रा वीनू कुमारी ने बताया कि आशीर्वाद संस्थान की मदद से वह बैंकिंग परीक्षा के इंटरव्यू तक पहुंच सकीं।
प्रशासन ने भी सराहा प्रयास
भागलपुर के डीएसपी (कानून-व्यवस्था) नवनीत कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘आशीर्वाद’ जैसे संस्थान सीधे तौर पर गरीब और जरूरतमंद छात्रों को लाभ पहुंचाते हैं और समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। बांस की झोपड़ी में चल रहा यह संस्थान आज सैकड़ों युवाओं के लिए उम्मीद की मशाल बन चुका है।
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