बोलता सच,नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के उद्देश्य से कई अहम कानूनों को मंजूरी दी है। इनमें मनरेगा की जगह नया रोजगार गारंटी कानून, बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश, और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी जैसे बड़े फैसले शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और निवेश को नई गति मिलेगी।
मनरेगा की जगह नया कानून, 125 दिन रोजगार की गारंटी
सरकार ने मौजूदा मनरेगा की जगह एक नया कानून लाने का फैसला किया है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिन का रोजगार मिलेगा। अभी यह सीमा 100 दिन है। इस योजना पर केंद्र सरकार करीब 95,600 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
नए कानून के तहत यदि किसी परिवार को काम नहीं मिल पाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
क्यों अहम है यह फैसला
मनरेगा को लेकर विपक्ष लंबे समय से सरकार पर फंड कम देने का आरोप लगाता रहा है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इस योजना को लेकर राजनीतिक विवाद भी रहा है। ऐसे में रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी को सरकार की ओर से ग्रामीण और गरीब वर्ग को साधने की कोशिश माना जा रहा है।
गौरतलब है कि बीजेपी ने पहले मनरेगा को यूपीए सरकार की विफलता का प्रतीक बताया था, लेकिन अब इसे सुधार कर नए स्वरूप में पेश किया जा रहा है।
नए ढांचे में होंगे सभी प्रोजेक्ट
नए रोजगार गारंटी कानून के तहत सभी परियोजनाएं ‘विकसित भारत नेशनल इंफ्रा स्टैक’ का हिस्सा होंगी, जिन्हें पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत तैयार किया जाएगा। इसमें जल संरक्षण और जल सुरक्षा पर विशेष जोर होगा।
खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को 60 दिन पहले योजना तैयार करनी होगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों के अनुसार, 25 दिन के अतिरिक्त रोजगार से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी। इससे उपभोग में इजाफा होगा और बाजार को भी फायदा पहुंचेगा। यह कदम रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को मजबूती देगा।
परमाणु ऊर्जा में निजी कंपनियों को एंट्री
सरकार एक नया ‘शांति बिल’ लाने की तैयारी में है, जिसके तहत निजी और विदेशी कंपनियों को सिविल न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में काम करने की अनुमति मिलेगी। इससे देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
बीमा क्षेत्र में 100% FDI
कैबिनेट ने बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की मंजूरी भी दे दी है। इससे बीमा कंपनियों को ज्यादा पूंजी मिलेगी और वे जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति से जुड़े बेहतर बीमा उत्पाद उपलब्ध करा सकेंगी। सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाना है।
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