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छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाला: 540 करोड़ की अवैध वसूली से चुनावी खर्च और रिश्वत, ईडी का बड़ा दावा

Bolta Sach News
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Chhattisgarh coal levy scam
बोलता सच,छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित अवैध कोयला लेवी घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने सोमवार को कहा कि इस घोटाले के जरिए जुटाए गए करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का एक हिस्सा चुनावी खर्च, नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत देने तथा संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने बताया कि धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही जांच में उसने छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में उप सचिव रह चुकी निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और एक अन्य व्यक्ति की कुल 2.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। ईडी ने इस कार्रवाई के तहत कुल आठ अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनमें भूखंड और आवासीय फ्लैट शामिल हैं।

ईडी के अनुसार, आरोपी सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर ने कोयले पर लगाए गए अवैध शुल्क और अन्य उगाही से अर्जित अपराध की कमाई से ये संपत्तियां खरीदी थीं। इन संपत्तियों को रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज कराया गया था।

क्या है पूरा मामला

जांच एजेंसी के मुताबिक, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से निजी लोगों के एक गिरोह ने कोयला परिवहन करने वालों से प्रति टन 25 रुपये की दर से अवैध वसूली की। आरोप है कि इस रैकेट के जरिए लगभग 540 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई।

ईडी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावी गतिविधियों पर खर्च करने और चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।

कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस पार्टी ने ईडी के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अपनी पूर्ववर्ती सरकार को बदनाम करने की राजनीतिक साजिश करार दिया है।

अब तक की जांच

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार के दौरान प्रभावशाली मानी जाने वाली अधिकारी सौम्या चौरसिया समेत 10 अन्य लोगों को ईडी ने गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।

ईडी अब तक इस मामले में पांच आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें 35 व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। यह धनशोधन मामला वर्ष 2022 में बेंगलुरु पुलिस की एफआईआर, 2023 में आयकर विभाग के आरोपपत्र और 2024 में छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW/ACB) की शिकायत से जुड़ा हुआ है।


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