बोलता सच,नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को देशभर में चल रहे अपने 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। पार्टी ने निर्णय लिया कि आम जनता, मनरेगा श्रमिकों और अन्य हितधारकों को सीधे जोड़ते हुए पंचायत स्तर तक जनसंपर्क को और मजबूत किया जाएगा।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 10 जनवरी को यह अभियान शुरू किया था। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘विकसित भारत – जी राम जी’ अधिनियम के जरिए संप्रग सरकार के समय लागू किए गए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस इस अधिनियम को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग कर रही है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि इस संबंध में एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, प्रभारी महासचिव और मनरेगा समन्वय समिति के सदस्य शामिल हुए। बैठक में यह सामूहिक संकल्प लिया गया कि आंदोलन को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए पंचायत स्तर पर संपर्क अभियान को तेज किया जाएगा।
वेणुगोपाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि अभियान के अगले चरण में वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद विधानसभा और लोक भवनों का घेराव किया जाएगा, साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस मनरेगा श्रमिकों की समस्याओं, रोजगार की अनिश्चितता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को प्रमुखता से उठाएगी।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के सम्मान और आजीविका से जुड़ा हुआ कानून है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा के तहत काम के दिन घटे हैं और भुगतान में देरी हो रही है, जिससे करोड़ों ग्रामीण श्रमिक प्रभावित हो रहे हैं।
इस आंदोलन को और धार देने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। वेणुगोपाल ने बताया कि राहुल गांधी 20 जनवरी को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में आयोजित ‘मनरेगा चौपाल’ में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों और उनकी गरिमा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएगी।
कांग्रेस का कहना है कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए वह सरकार पर दबाव बनाएगी, ताकि ग्रामीण रोजगार की इस अहम योजना को कमजोर करने के प्रयास रोके जा सकें और इसे पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाए।
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