बोलता सच,बिहार : आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने पांच राज्यों—केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—में अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने चुनावी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के युवा नेता कन्हैया कुमार को केरल का पर्यवेक्षक बनाए जाने को लेकर हो रही है, जबकि पश्चिम बंगाल के लिए बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
केरल में 140 विधानसभा सीटें हैं और यहां अप्रैल–मई में चुनाव होने की संभावना है। कांग्रेस ने राज्य के लिए चार पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं, जिनमें सचिन पायलट, कर्नाटक सरकार के मंत्री केजे जॉर्ज, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और कन्हैया कुमार शामिल हैं। जहां सचिन पायलट का अनुभव और संगठनात्मक पकड़ कांग्रेस की मजबूती मानी जा रही है, वहीं कन्हैया कुमार की नियुक्ति को एक रणनीतिक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, केरल की सामाजिक संरचना और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने यह संतुलन साधा है। राज्य में हिंदू आबादी बहुसंख्यक है, जबकि मुस्लिम और ईसाई समुदाय भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। केजे जॉर्ज और इमरान प्रतापगढ़ी की नियुक्ति को क्रमशः ईसाई और मुस्लिम समुदाय से संवाद की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि सचिन पायलट और कन्हैया कुमार के जरिए हिंदू और युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति अपनाई गई है।
कन्हैया कुमार की भूमिका इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उनका राजनीतिक सफर वामपंथी छात्र राजनीति से शुरू हुआ है। जेएनयू में वामपंथी छात्र संगठन से जुड़े रहे कन्हैया कुमार बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। चूंकि केरल लंबे समय से वामपंथी दलों का मजबूत गढ़ रहा है, ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि एक पूर्व वामपंथी नेता होने के नाते कन्हैया कुमार लेफ्ट फ्रंट की राजनीति को बेहतर ढंग से चुनौती देने की रणनीति तैयार कर सकते हैं। इसके साथ ही उनकी युवा छवि कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा का स्रोत मानी जा रही है।
फिलहाल केरल में वामपंथी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सत्ता में है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) मुख्य विपक्षी गठबंधन है। हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ के बेहतर प्रदर्शन के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व ने समय रहते संगठन को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति को धार देने के लिए पर्यवेक्षकों की यह टीम मैदान में उतारी है।
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