बोलता सच,गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में फर्जी एसटीएफ अधिकारी बनकर ठगी करने के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के निर्देश पर कोतवाली देहात पुलिस ने इस मामले में छह शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल की गई एक कार, दो फर्जी पुलिस पहचान पत्र, एक धातु का कलश और 431 सफेद धातु के सिक्के बरामद किए हैं। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर की गई, जो 18 दिसंबर को उपेन्द्र सिंह उर्फ उपेन्द्र बाबा, निवासी ग्राम परमेश्वरपुर (रोहतास, बिहार) ने दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, 17 दिसंबर को ठकुरापुर स्थित बाबा कुटी में मंदिर निर्माण के लिए जेसीबी से खुदाई के दौरान मिट्टी में दबा एक ठोस धातु का कलश मिला था, जिसमें कुल 509 सफेद धातु के सिक्के थे। अगले दिन, 18 दिसंबर को दोपहर करीब दो बजे उपेन्द्र बाबा कलश को इनोवा कार में रखकर बालपुर बाजार जा रहे थे। इसी दौरान परसपुर मोड़ के पास एक मारुति कार सवार 4-5 लोगों ने खुद को एसटीएफ अधिकारी बताते हुए उनकी गाड़ी रुकवाई।
आरोपियों ने पुलिस जांच का डर दिखाकर उपेन्द्र बाबा को बालपुर जाट स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास ले गए और सिक्कों से भरा कलश जबरन अपनी गाड़ी में रखकर फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कई टीमों का गठन किया।
जांच के दौरान कोतवाली देहात पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे आपस में दोस्त हैं। खुदाई के समय जेसीबी चला रहे हरिओम दुबे की नजर कलश पर पड़ी थी, जिसके बाद सभी ने लालच में आकर उसे हड़पने की साजिश रची। योजना के तहत उन्होंने फर्जी एसटीएफ अधिकारी बनकर कूटरचित पहचान पत्र दिखाए, साधु-संतों को धमकाया और कलश लेकर फरार हो गए। वे सिक्कों को बेचने की फिराक में थे, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में त्रिलोकी पांडेय, आलोक शुक्ला उर्फ सुधीर, हरिओम दुबे, प्रिंस मिश्रा, राहुल यादव उर्फ बब्लू और मनोज मिश्रा शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ कोतवाली देहात थाने में विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया है।
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