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अयोध्या में तैनात राज्य कर उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने वापस लिया इस्तीफा, बोले– मुझ पर कोई दबाव नहीं

Bolta Sach News
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Deputy Commissioner of State Tax posted in Ayodhya
बोलता सच,अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में तैनात राज्य कर उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध और सरकार के समर्थन में अधिकारियों को त्यागपत्र भेजा था। अब समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से अपना इस्तीफा वापस लिया है और उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है।

प्रशांत कुमार सिंह ने कहा, “मैंने अपना त्यागपत्र वापस ले लिया है। मुझ पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। शनिवार को मैं अपने कार्यालय में मौजूद हूं और नियमित रूप से अपना कार्य कर रहा हूं।”
अपने भाई विश्वजीत सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उनका भाई मुख्तार अंसारी की मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य रहा है और उसका आर्थिक सलाहकार भी रह चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका भाई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जिसके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
प्रशांत कुमार सिंह के अनुसार, “मेरे भाई ने अपने माता-पिता के साथ मारपीट की, जिस संबंध में एफआईआर दर्ज है। उसने जिओ कंपनी के एक ब्रांच मैनेजर को जान से मारने की धमकी भी दी थी। वह जबरन वसूली करता है और पैसों के लिए लोगों पर दबाव बनाना उसका काम है।”
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में उनके भाई ने सीएमओ, मऊ को एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें उनके दिव्यांग प्रमाणपत्र को फर्जी बताया गया था। आरोप लगाया गया था कि प्रमाणपत्र पर तारीख और डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सीएमओ, मऊ ने विश्वजीत सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों को सीधे तौर पर स्वीकार करने के बजाय उन्हें जांच के लिए तलब किया। जबकि वही प्रमाणपत्र सीएमओ कार्यालय, मऊ से ही जारी किया गया था।
प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि बाद में वह मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या के समक्ष प्रस्तुत हुए, जहां अयोध्या के सीएमओ ने मऊ के सीएमओ से प्रमाणपत्र की सत्यता को लेकर जानकारी मांगी। इसके जवाब में मऊ के सीएमओ ने लिखित रूप से प्रमाणपत्र को सही बताया।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद बार-बार प्रमाणपत्र को फर्जी बताकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि सभी तथ्यों और दस्तावेजों से यह प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध सिद्ध हो चुका है।

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