बोलता सच,नई दिल्ली : सर्दी के बढ़ते असर के साथ ही राजधानी दिल्ली में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। 1 जनवरी 2026 को दिल्ली में अधिकतम पावर डिमांड 5603 मेगावॉट दर्ज की गई, जबकि 2 जनवरी को यह 5595 मेगावॉट रही। यह आंकड़ा अनुमानित पीक पावर डिमांड से महज 405 मेगावॉट कम है।
बिजली वितरण कंपनियों के अनुसार, इस सर्दी में दिल्ली की पीक पावर डिमांड 6000 मेगावॉट तक पहुंच सकती है। पिछले साल सर्दियों में अधिकतम बिजली मांग 5655 मेगावॉट दर्ज की गई थी। कंपनियों का कहना है कि कुछ ही दिनों के अंतराल में यह तीसरी बार है जब सर्दियों के दौरान बिजली की मांग 5000 मेगावॉट के पार पहुंची है।
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों ने विभिन्न स्रोतों से बिजली की व्यवस्था की है। इसमें 840 मेगावॉट सोलर पावर, 232 मेगावॉट रूफटॉप सोलर, 500 मेगावॉट विंड पावर, 77 मेगावॉट हाइब्रिड पावर और 647 मेगावॉट हाइड्रो पावर शामिल है।
मांग में बढ़ोतरी की मुख्य वजह मौसम को बताया जा रहा है। मौसम अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में हर साल बिजली की मांग में 6 से 8 प्रतिशत की वृद्धि होती है, जिसमें मौसम की अहम भूमिका होती है। इसी कारण बिजली कंपनियां अब वेदर फोरकास्टिंग तकनीक का सहारा ले रही हैं।
बिजली वितरण कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की मदद से मौसम का सटीक अनुमान लगा रही हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि बारिश होगी या नहीं, तापमान बढ़ेगा या गिरेगा और हवा की गति कैसी रहेगी। मौसम की सटीक जानकारी के आधार पर बिजली की मांग का बेहतर अनुमान लगाकर आपूर्ति को संतुलित किया जा रहा है।
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