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शंकराचार्य से जुड़े घटनाक्रम पर यूपी की सियासत गरमाई, सुल्तानपुर में कांग्रेस का पोस्टर वार

Bolta Sach News
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बोलता सच,लखनऊ/सुल्तानपुर : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। धार्मिक भावनाओं और सनातन परंपराओं से जुड़े इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में शनिवार को कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने सुल्तानपुर में होर्डिंग लगाकर न केवल कड़ा विरोध जताया, बल्कि भाजपा सरकार के दावों पर भी सवाल खड़े किए।

सुल्तानपुर में कथित शंकराचार्य अपमान को लेकर पोस्टर वार शुरू हो गया है। जिला कलेक्ट्रेट के पास कांग्रेस नेता शरद शुक्ला द्वारा लगाए गए होर्डिंग में बड़े अक्षरों में लिखा गया— “शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” इस होर्डिंग के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है।

शंकराचार्य को बताया ‘परमाराध्य’, किया प्रणाम

कांग्रेस नेता शरद शुक्ला द्वारा लगाए गए होर्डिंग में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ‘परमाराध्य’ बताते हुए उन्हें कोटिशः प्रणाम किया गया है। होर्डिंग में धार्मिक और नैतिक संदर्भों के तहत मनुस्मृति और रामचरितमानस के श्लोकों का भी उल्लेख किया गया है।
मनुस्मृति के श्लोक के जरिए गुरु या वेदाचार्य के अपमान को घोर परिणाम देने वाला बताया गया है, जबकि रामचरितमानस की पंक्तियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जब प्रभु की कृपा हटती है, तो व्यक्ति की बुद्धि पहले ही नष्ट हो जाती है।

सनातन परंपराओं के समर्थन का दावा

शरद शुक्ला ने कहा कि वह शंकराचार्य के सम्मान और सनातन परंपराओं के पक्ष में पूरी मजबूती से खड़े हैं। उनके अनुसार प्रयागराज की घटना ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और इस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया जरूरी थी। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।

सुल्तानपुर में एक और होर्डिंग, भाजपा पर निशाना

इसी मुद्दे को लेकर सुल्तानपुर में कांग्रेस नेता सुब्रत सिंह ने भी कलेक्ट्रेट के पास होर्डिंग लगवाई है, जिसमें लिखा है— “शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” पोस्टर में जगद्गुरु शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ कथित अभद्रता पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा गया है।

भाजपा के दावों पर उठे सवाल

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के “सबके साथ, सबका विकास” और “सनातन की सरकार” जैसे दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में सनातन परंपराओं का सम्मान करती है, तो शंकराचार्य जैसे धर्मगुरुओं के साथ हुए कथित व्यवहार पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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