बोलता सच,अयोध्या : मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के खेड़ी सावलीगढ़ गांव निवासी धनंजय सिंह और गोरेगांव निवासी केसो मोरले बृहस्पतिवार को रामनगरी अयोध्या पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले युवाओं के एक समूह ने ‘रामायण मंडल’ के नाम से साप्ताहिक मानस पाठ की शुरुआत की थी। वर्ष 2015 में यह दल अयोध्या आया था और वेद मंदिर में मानस पारायण किया था। उस समय रामलला को टेंट में देखकर लगभग 12 युवकों के मन में पीड़ा हुई और उन्होंने संकल्प लिया कि मंदिर निर्माण के बाद ही दोबारा दर्शन करेंगे।
05 अगस्त 2020 को भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद समूह को कुछ विशेष करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने तय किया कि अयोध्या खाली हाथ नहीं जाएंगे और देश के गांवों की पवित्र मिट्टी तथा क्षेत्र की नदियों का जल एकत्र कर प्रभु रामलला को अर्पित करेंगे।
करीब 300 साथियों के सहयोग से सूर्यपुत्री ताप्ती, चंद्रपुत्री पूर्णा, बेल, बेतवा, देवना, तवा, काजल, मोरण, बेलगंगा, सूखी नदी, सापना सहित क्षेत्र को जीवन देने वाली कुल 103 छोटी-बड़ी नदियों और सहायक नदियों का जल तथा जनपद के 1490 गांवों में से 1341 गांवों की पवित्र मिट्टी एकत्र की गई। इस पूरे अभियान में लगभग 50 दिन का समय लगा।
27 दिसंबर को बैतूल के गंज स्थित राधाकृष्ण मंदिर में भगवा ध्वज के पूजन-अर्चन के साथ पदयात्रा की शुरुआत हुई। पदयात्रियों ने प्रतिदिन औसतन 50 किलोमीटर की दूरी तय की और विभिन्न 30 पड़ावों पर विश्राम करते हुए 20 जनवरी को अयोध्या के ब्रह्मदेव स्थान पहुंचे।
22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय से समय मिलने पर कारसेवकपुरम पहुंचकर एकत्रित जल और मिट्टी उन्हें समर्पित की गई। इससे पहले 21 जनवरी को रामलला के दर्शन के दौरान मंदिर परिसर की मिट्टी ली गई और सायंकाल सरयू नदी को प्रणाम कर सरयू रज क्षेत्रीय सहयोगियों में वितरण के लिए एकत्र किया गया।
इस पूरे कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र प्रचारक सप्लेश कुलकर्णी, प्रांत प्रचारक विमल गुप्त और जिला प्रचारक अंबाराम का सहयोग रहा।
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